पानीपत के उद्यमियों ने थ्री डी चादर बनाने के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया है। मात्र एक साल में थ्री डी चादर का कारोबार 300 करोड़ तक पहुंच गया है। मिंक कंबल के बाद थ्री डी चादर बनाने में एक साल पहले इसमें चीन की बादशाहत थी। वहां से आने वाली सस्ती व डिजाइनदार चादर की चमक को कम करने के लिए यहां के उद्यमियों ने दिन-रात एक कर दिया।
चीन के प्रभुत्व का खत्म करने व देशवासियों को थ्री डी चादर उपलब्ध कराने के लिए एक साल पहले पानीपत के उद्यमी चीन से मशीन लेकर आए थे। इसके बाद यहीं पर थ्री डी चादर बनाने शुरू की थ्री डी चादर बनाने के कारोबार में पोलर कंबल उद्योग भी कूद गए हैं। ऑफ सीजन में पोलर कंबल के स्थान पर थ्री डी चादर बनाई जाती है। फिलहाल उद्यमी थ्री डी चादर की दरों पर भी काम कर रहे हैं, ताकि दरें कम की जा सके। पहले पोलर व मिंक कंबल चीन से आता था।
कई देशों में भी शुरू किया निर्यात-
पानीपत में बनने वाली थ्री डी चादर का अब अन्य देशों में निर्यात होना शुरू हो गया है। पहले पानीपत हैवी चादर के लिए मशहूर था। यहां की बनी बेडशीट शादी विवाह में उपहार देने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। चीन से थ्री डी चादर आने के बाद यहां उद्योग लगभग ठप हो गया था। अब लोग भी पानीपत में बनी थ्री डी चादर खरीदते हैं। चीन से उद्यमियों ने थ्री डी की चादर खरीदनी बंद कर दी है।
60-70 से शुरू होकर 400 रुपये तक बिकती
थ्री डी चादरें 60 से शुरू होकर 400 रुपये तक थोक में बिकती हैं। रिटेल में 100 से 1000 रुपये तक बिकती हैं। 300 करोड़ से अधिक की थ्री डी चादरों का कारोबार अकेले पानीपत से हो रहा है।
हल्की रेंज में पूरा कब्जा -
कारोबारी ईश्वर मित्तल का कहना है कि 80 फीसदी पानीपत की बनी चादरें बिक रही हैं। गिफ्ट पैक आइटम 20 फीसदी अभी भी चीन से आ रहे हैं। महंगी क्वालिटी पर भी यहां के उद्यमी काम कर रहे हैं। पोलर कंबल उद्योगों के लिए 3डी संजीवनी साबित हुई। पहले ऑफ सीजन में पोलर उद्योग बंद करने पड़ते थे।
जएसटी ड्यूटी वृद्धि का भी लाभ-
जीएसटी ड्यूटी में बढ़ोतरी से चीन से आने वाली चादर महंगी पड़ने लगी। इसका लाभ स्थानीय उद्योगों को मिल रहा है। अब यहां के उद्योग चीन से सस्ती चादर बेच रहे हैं।
पानीपत में होनी चाहिए रिसर्च केंद्र की स्थापना-ग्रोवर
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव मनीष अग्रवाल का कहना है कि सरकार यहां के टेक्सटाइल उद्योगों पर ध्यान दे तो निर्यात दोगुना होगा। साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। उद्योगों को खड़ा करने में उद्यमियों की अपनी मेहनत काम कर रही है। पानीपत में रिसर्च केंद्र (आरएंडडी) की स्थापना होनी चाहिए। जिससे यहां के उद्यमियों को नए आइडिया मिल सके।