पानीपत। परिवार पहचान पत्र के आधार पर शहर की जनसंख्या को लेकर होने जा रही नई वार्डबंदी में वार्डों की संख्या तो पहले की तरह 26 ही रहेगी लेकिन अगर इन वार्डों की सीमाएं बदलीं तो एक बार फिर से लोगों को इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे। जिस जिस वार्ड की सीमा बदलेगी वहां के लोगों को अपने प्रमाणपत्रों में रिहायशी पते बदलवाने पड़ेंगे।
गौरतलब है कि निगम ने जिस जिस वार्ड में पार्षदों के नाम, गली मोहल्ले के नाम, चौक चौराहों के नाम के साइन बोर्ड लगवाए थे उनको भी बदला जाएगा। इसके अलावा पिछली बार की तरह लोगों में फिर से असमंजस रहेगा कि उनके वोट किस वार्ड के हैं, उनकी वोटिंग कहां होनी है और कौन उनके प्रत्याशी हैं। वहीं, नए उम्मीदवारों से लेकर बनने वाले पार्षदों को भी ये समझने में दिक्कत होगी कि वे वोट कहां मांगे और अपने एरिया के विकास कार्य कहां करवाएं।
उल्लेखनीय है कि नए वार्डबंदी को लेकर सरकार की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट है कि अबकी बार निकाय चुनाव की जनवरी 2024 के बाद कभी भी घोषणा हो सकती है। अनुमान जताया जा रहा है कि इस बार लोकसभा चुनाव के बाद ही नई वार्डबंदी के आधार पर निकाय चुनाव होंगे। दूसरी ओर अब तक परिवार पहचान पत्र में दिखाई गई जनसंख्या से भी अधिकारी और नेता संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। इसी के आधार पर एससी, बीसी, महिला के वार्डों का आरक्षण निर्धारित होना है।
बोले पार्षद एवं कमेटी सदस्य:
बदलाव की जरूरत नहीं
पहले वाली वार्डबंदी सही हुई है। इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है। इसे लेकर लोगों से बातचीत की जा रही है, लोगों की राय है कि इसमें ज्यादा छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। पहले परिषद में वार्डबंदी हुई, अब चौथी बार बदलने जा रही है।
संजीव दहिया, पार्षद वार्ड 21 एवं कमेटी सदस्य।
जरूरी है वार्डबंदी
वार्डबंदी कानूनी प्रक्रिया है। ये जरूरी होती है। इससे चुनाव को लेकर लोगों में राजनीतिक जागरूकता आएगी। अगर किसी को लगता है कि वार्डबंदी सही नहीं हुई तो इस पर आपत्ति दर्ज कराने का भी प्रावधान है।
रविंद्र भाटिया, पार्षद वार्ड दस।
शहरवासियों को होगी परेशानी
अगर एक बार फिर से वार्डबंदी होती है तो इससे सबसे ज्यादा परेशानी शहर के लोगों को ही होगी। सभी को अपने दस्तावेज फिर से अपडेट करवाने पड़ेंगे। वोट डालने से लेकर वोट मांगने वालों को भी परेशान होना पड़ेगा। अब नई वार्डबंदी की जरूरत नहीं है।
बलराम मकौल, पार्षद वार्ड 18
नई की आवश्यकता नहीं
जो पहले है वही वार्डबंदी सही है। अब इसमें बदलाव को कोई आवश्यकता ही नहीं है। वार्डों की संख्या से लेकर सीमाएं तक सही है। पिछली बार लोगों को काफी परेशान होना पड़ता था, अब फिर से नई वार्डबंदी हुई तो फिर परेशान होना पड़ेगा।
चंचल डावर, पार्षद वार्ड 23