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Panipat News: तड़पता मिला था घायल स्ट्रीट डॉग, अब मेरे परिवार का बना हिस्सा

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मुझे बचपन से ही स्ट्रीट डॉग से लगाव रहा है। उन्हें गली में या कहीं घायल देखकर मन झकझोर जाता था। फिर मैंने अपनी मां की सहायता से उनकी मदद करनी शुरू की और उन्हें अपने घर पर लाकर उनका इलाज करवाने लगीं। इसमें मेरी मां व मेरा छोटा भाई सहयोग करते आए हैं। आठ साल पहले गली में एक छोटे पिल्ले की दोनों टांगों पर कोई मोटरसाइकिल चढ़ाकर निकल गया जिससे वह खड़ा नहीं हो पा रहा था और दर्द से कराह रहा था। मुझसे यह देखा नहीं गया और उसे घर ले आई। तब मैं नई पहल वेलफेयर सोसाइटी से जुड़ीं और उनके निजी चिकित्सक से उस छोटे से पिल्ले का इलाज करवाया। मेरी मां ने भी उसकी देखभाल व इलाज में मदद की। फिर हमने मिलकर उसका नाम कालो रखा। अब प्यार से हम उसे कालो बुलाते हैं और वह घर में हर समय मेरे आस-पास रहती है।
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कालो के साथ गली के अन्य घायल पिल्ले भी मेरे घर के बाहर-अंदर ही रहते हैं। लालू, जुली भी कालो के अच्छे दोस्त हैं जो मेरे घर में ही खेलते रहते हैं। मैं सभी को खाना खिलाती हूं। जब भी मैं कहीं जाती हूं तो अपने साथ पिल्लों के लिए मेडिकल किट जरूर लेकर जाती हूं। ताकि रास्ते में यदि ऐसा कोई घायल या जरूरतमंद पिल्ला मिलता है तो उसकी मदद करती हूं। कालो व अन्य पिल्लों के खाने के लिए मैं उन्हें दूध, ब्रेड, बिस्किट, फीड, दही, मौसमानुसार लस्सी देती हूं। कुछ स्ट्रीट डॉग रोटी क्रीम के साथ खाते हैं तो प्रतिदिन ताजी क्रीम खरीदकर उन्हें रोटी खिलाती हूं ताकि वे अच्छे से अपना पेट भर सके और कोई भूखा न रहे।
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प्रस्तुति : पूजा वर्मा, राजीव कॉलोनी
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