पानीपत। टोक्यो पैरा ओलंपिक के लिए रविवार को रवाना होने से पहले जेवलिन थ्रोअर नवदीप ने कहा कि देश के लिए खेलने जा रहा हूं और मान बढ़ाकर आऊंगा। दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद नवदीप से अमर उजाला की खास बात हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके लिए गर्व की बात है कि पैरा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। इस मौके को यूं ही नहीं जाने देंगे। पदक के लिए अपना सबकुछ झोंक देंगे।
नवदीप ने कहा कि ओलंपिक या पैरा ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका सभी को नहीं मिलता है, यह मौका उन्हें मिला है, इससे ज्यादा गर्व की बात क्या हो सकती है। टोक्यो पैरा ओलंपिक के रूप में उन्हें जो मौका मिला है, उसे खाली नहीं जाने देंगेे। टोक्यो में देश का मान बढ़ाएंगे। पैरा ओलंपिक में अपनी तैयारी के बारे में नवदीप ने कहा कि उनकी तैयार बहुत ही अच्छी है। पैरा ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश रहेगी। इसमें कोई कसर नहीं रहेगी। देश की झोली में स्वर्ण पदक लाने के लिए बहुत मेहनत की है, अब परिणाम की बारी है। उम्मीद है कि तैयारी के मुताबिक ही प्रदर्शन भी रहेगा।
रोजाना 10 घंटे के अभ्यास से मिला है आत्मविश्वास
नवदीप टोक्यो पैरा ओलंपिक के लिए करीब छह महीने से तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान अभ्यास की अवधि चार घंटे बढ़ाकर 10 घंटे कर दी गई। इसी अभ्यास ने नवदीप को आत्मविश्वास दिया है कि वह देेेश के लिए पदक लेकर आएंगेे। नवदीप ने बताया कि टोक्यो पहुंचने के बाद भी उनके अभ्यास का रूटीन जारी रहेगा। चार सितंबर को मुकाबला होने तक वहां के टोक्यो के मौसम के मुताबिक शरीर को ढालना है।
घर वाले रात को 10 बजे करते थे कॉल का इंतजार
नवदीप के घर वाले रोजाना 10 बजे नवदीप के कॉल का इंतजार करते थे। नवदीप के पिता दलबीर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से वह केवल टोक्यो पैरा ओलंपिक की तैयारी कर रहा है, जिसकी वजह से वह रात को खाली होने के बाद 10 बजे कॉल करता था। वह हर रोज इंतजार करते थे कि बेटे का कॉल आएगा, लेकिन टोक्यो पैरा ओलंपिक की तैयारी के कारण वह महीने में दो बार ठीक से बात कर सका।
पिता दलबीर ने कहा बेटा मेरा सपना पूरा करके आना
नवदीप के पिता दलबीर भी कुश्ती के खिलाड़ी थे। जो केवल राज्य स्तर तक खेल पाए और घर की जिम्मेदारी आने के कारण आगे खेल नहीं पाए। जब नवदीप का जन्म हुआ तो महज 10 साल की उम्र में ही उसे कुश्ती सिखाना शुरू कर दिया। नवदीप का कद काफी छोटा था, फिर भी वह अपने से बड़े और लंबे खिलाड़ी को भी चित कर देते थे। हालांकि अभ्यास के दौरान कमर में चोट लगने के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी।