पानीपत। शहर के लोगों को यहां की हवा का हाल चाल जानने में परेशानी हो रही है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सेक्टर 18 में लगाया गया एक्यूआई मापक यंत्र पिछले 65 दिन में नौ बार खराब रहा है। एक्यूआई मापक यंत्र रविवार को भी खराब रहा। इससे पहले छह व तीन नवंबर को बंद रहा।
उल्लेखनीय है कि मापक यंत्र अक्टूबर में छह दिन खराब रहा। वहीं दूसरी ओर इस साल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मापक यंत्र पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। करनाल, सोनीपत व जींद एक्यूआई अक्टूबर में लगभग हर दिन रेडजोन में रहा, जबकि 20 हजार फैक्टरी संचालित करने वाले पानीपत का एक्यूआई महज दो दिन ही रेड जाेन में दर्शाया गया। जबकि निजी साइटों के अनुसार पानीपत का एक्यूआई पिछले 40 दिन में 10 से अधिक बार रेड जोन में रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समीर ऐप के अनुसार अब बरसात के बाद से शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स स्थिर बना हुआ है। तीन दिन से एक्यूआई 159 से 162 के बीच है। सोमवार को भी एक्यूआई यलो जोन में 159 दर्ज किया गया है। अब हवा की रफ्तार आठ किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसलिए धुआं व धूल के कण भूमि से काफी ऊपर उठ रहे हैं। इसलिए एक्यूआई स्थिर बना हुआ है। अब शहर की हवा में धूल की बजाय धुएं की मात्रा अधिक है। धुएं की अधिकतम मात्रा 165 व धूल के कणों की मात्रा 142 दर्ज की गई है। शहर से गुजर रहे एक लाख वाहनों के धुंए से हवा में धुएं की मात्रा बढ़ी है। पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ के अनुसार आने वाले दिनों में हवा की रफ्तार कम रही तो एक्यूआई बढ़ेगा। शहर की हवा खराब होगी।
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शहर की हवा का हाल
सोमवार को हवा में 2.5 की न्यनूतम मात्रा 118, औसत 132 और अधिकतम 142 दर्ज की गई । पीएम- 2.5 की मात्रा 10 अंक बढ़ी है। पीएम-10 की मात्रा न्यूनतम 152, औसत 159 और अधिकतम 165 दर्ज की गई है। पीएम- 10 की न्यूनतम व औसत मात्रा बढ़ रही है। नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा न्यूनतम 28, औसत 30 व अधिकतम 33 दर्ज की गई है। अमोनिया की मात्रा न्यनूतम दो व औसत व अधिकतम तीन दर्ज की गई है। हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 25, औसत 25 व अधिकतम 27 दर्ज की गई। सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा न्यनूतम 12 व अधिकतम 13 दर्ज की गई है। शहर की हवा अब भी काफी प्रदूषित है।
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हवा में धूल की बजाय धुएं की मात्रा अधिक
पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि हवा की रफ्तार आठ किलोमीटर है। इसलिए एक्यूआई स्थिर है। हवा में धूल की बजाय धुएं की मात्रा अधिक है। अगर हवा की रफ्तार कम हुई तो एक्यूआई बढ़ेगा। फिलहाल हवा में सल्फर व अमोनिया की मात्रा भी कम है। प्रदूषण के कारकों का निरीक्षण होना जरूरी है।