पानीपत। प्रदेश के राजकीय व निजी स्कूलों में शीतकालीन अवकाश वीरवार को शुरू हो गए हैं। इस बार 15 दिवसीय शीतकालीन अवकाश के लिए विद्यार्थियों को जो गृहकार्य दिया गया है, उससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ संस्कारवान बनेंगे। पीटीएम में अभिभावकों को भी बच्चों के गृहकार्य कराने की जिम्मेदारी सौँपी गई है। इस बार विद्यार्थियों को लिखने या रटने की प्रवृति का नहीं, अनुभव आधारित गृह कार्य दिया गया है। अवकाश के दौरान विद्यार्थी अपने पुरखों की जानकारी भी हासिल करेंगे
अध्यापकों ने अभिभावकों को बताया कि बच्चों को पढ़ाई के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिए इस बार गृह-कार्य में बदलाव किया है। उन्होंने अभिभावकों को गृह कार्य में किए बदलाव के उद्देश्यों से अवगत कराया। शीतकालीन अवकाश के लिए दिए गए गृह-कार्य में विद्यार्थी के साथ परिवार की भूमिका अहम होगी। इसमें नाना-नानी, दादा-दादी व घर के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका अदा करते हुए अपने अनुभव के आधार पर नई पीढ़ी को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल व्यवहार कुशलता प्रदान करेंगे। यह गतिविधियां विद्यार्थियों को पढने-लिखने, गणना कौशल देने के साथ आंकलन लगाना, एकीकरण, कहानी कहना, प्रस्ताव बनाना, देखना व समझना भी सिखाएंगी।
अभिभावकों को सौंपी जिम्मेदारी-
- शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें।
- स्कूल डायरी देखने के लिए 30 से 45 मिनट निकालें व गृह-कार्य पूरा करवाएं।
- रोज सभी विषयों में उनका प्रदर्शन देखें। उन विषयों का खास ध्यान रखें, जिसमें वह कमजोर है।
- सुबह जल्दी उठने की आदत डालें व ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दें।
- सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में बच्चों को शामिल करवायें, यह सीखने के शानदार अनुभव उपलब्ध करवाते हैं।
- बच्चे में पौधे लगाने व उनका ख्याल रखने की आदत का विकास करें।
- सोने के समय बच्चों को पंचतंत्र, तेनालीराम की शिक्षाप्रद कहानी और साहित्यिक, जातक, धार्मिक कथाएं भी सुनाएं।
- बच्चे की प्रतिभा का पता लगाकर उसे निखारने में सहायता करें। इसकी जानकारी कक्षा अध्यापक को अवश्य दें।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन के महत्व का ज्ञान दें।
- हर रविवार खाने की ऐसी चीज बनाएं जो बच्चों को पसंद हों, इसमें उन्हें मदद करने को कहें।
- बच्चों के पूछे सवाल का जवाब दें, जानकारी न होने पर कक्षा अध्यापक की सहायता लें।
- अनुशासन और जीने के बेहतर तरीके बताएं और सही व गलत का अंतर समझाएं।
- बच्चों में स्वयं पढ़ने व सीखने की आदत डालें। आप भी उनकी पाठ्य-पुस्तकें पढ़े।
- बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार दें, ताकि वह जीवन में सफल और अच्छे इंसान बन सकें।
वर्जन -
शिक्षा विभाग की ओर से इस बार शीतकालीन अवकाश के लिए विद्यार्थियों को दिए गए गृह-कार्य में बदलाव किया गया है। विद्यार्थियों के चहुंमुखी विकास के लिए दिया गया गृहकार्य अनुभव आधारित विभिन्न गतिविधियों पर आधारित होगा। इससे न केवल बच्चे संस्कारवान बनेंगे, बल्कि उनकी लिखने व रटने की प्रवृति दूर होगी। सभी गतिविधियां सर्द मौसम व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।
- सुभाष चंद्र भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।