अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर उग्रा खेड़ी के स्टेडियम में बलिदान दिवस हाईटेंशन माहौल में शांतिपूर्वक तरीके से मना। बलिदान दिवस पर बड़ी संख्या में महिलाएं और जाट समाज के लोग पहुंचे। बढ़ती भीड़ को देखते हुए रोहतक रूट को बंद कर दिया, जबकि पानीपत-शामली रूट को करनाल-मेरठ डायवर्ट कर दिया गया।
रविवार सुबह से ही मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थी। स्टेडियम में मौजूद 36 बिरादरी के लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर धरने को शुरुआत की। धरनास्थल के ठीक सामने सरकारी स्कूल में उपायुक्त डॉ. चंद्रशेखर खरे और पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा पूरी रिपोर्ट लेते रहे।
समिति ने बलिदान दिवस पर करीब 15 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया है, जबकि सरकारी रिपोर्ट करीब साढ़े आठ हजार बताया जा रहा है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट धरने में करीब तीन हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान जता रही है। आकलन के हिसाब से ढाई गुना अधिक भीड़ पहुंचने पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की धड़कन बढ़ी रही।
पुलिस अधिकारियों ने यातायात के विशेष प्रबंध रखे। उग्रा खेड़ी में धरने में सबसे पहले पिछले साल आरक्षण आंदोलन में मारे लोगों के एक संयुक्त फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। समिति के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मानवेंद्र वर्मा मुख्य अतिथि रहे।
उन्होंने कहा कि बलिदान दिवस पर पहुंची हजारों की भीड़ ने सरकार ही नहीं भाईचारा बिगाड़ने वालों को करारा जवाब दिया है। आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों की कुर्बानी को बेकार नहीं जाने देंगे। आज जाटों के बच्चे खेल और शिक्षा में ही नहीं एकजुटता और भाईचारे को लेकर भी सोशल मीडिया में छाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत को बुलाती है और समझौते कर मुकर जाती है। अब जाट समाज को अपनी मांगों को लेकर 36 बिरादरी का समर्थन मिल गया है। वे मांगों के लागू होने के बाद ही धरने से उठेंगे। उन्होंने कहा कि आरक्षण तो जाट समाज की झोली में है।
वे तो आंदोलन में मारे लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सरकार इस पर गंभीर नहीं होती है तो 22 फरवरी को दिल्ली के साथ लगते यूपी के 22 जिलों की संघर्ष समिति की बैठक होगी। इसमें हरियाणा कूच करने की रणनीति बनाई जाएगी। धरने को मानवेंद्र के साथ आए यूपी के उपाध्यक्ष डीपी सिंह और अशोक पंवार ने भी संबोधित किया।
कहा कि जब तक हरियाणा के जाटों सहित छह जातियों की मांगे पूरी नहीं होती, तब तक उत्तर प्रदेश की जनता उनके साथ खड़ी है। साथ ही प्रताप दहिया, प्रदेश महासचिव सुरेंद्र मलिक व जिला अध्यक्ष सतबीर सिंह देशवाल भी मौजूद रहे। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुरेंद्र दहिया, दीपक खटखड़,
पूर्व सरपंच बिंटू मलिक, निशान सिंह मलिक, यशपाल मलिक, मास्टर हरपाल, सुरेंद्र कादियान, सुरेश आर्य रिसालू, रमेश मलिक, संजीव मलिक, रणबीर गुलिया बुड़शाम, चर्तुभूज, सुरेश करहंस, रोहताश शेरा, जितेंद्र भापरा और दिलबाग सिंह मौजूद रहे।
जत्थों के रूप में पहुंचे लोग
उग्रा खेड़ी स्टेडियम में सुबह दस बजे ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। इसके बाद लोगों का ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में जत्थों के रूप में पहुंचना शुरू हो गया। समिति द्वारा वाहनों की गिनती के लिए भी स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई। उनके अनुसार धरने पर 253 ट्रैक्टर-ट्राली,
800 मोटरसाइकिल, 125 कार और जीप सहित चार पहिया वाहन, 12 बुग्गी और सात कैंटरों में सवार होकर लोग स्टेडियम में पहुंचे। सूत्रों के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में 158 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 85 कारें, 500 मोटरसाइकिल, छह बुग्गी और चार कैंटर दर्ज किए गए हैं।
मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद
प्रशासन ने आरक्षण आंदोलन को देखते हुए सुबह ही मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद करवा दिया था। लोग सुबह मोबाइल में इंटरनेट सिग्नल गायब मिलने पर परेशान हो गए। कुछ लोग दिनभर कनेक्शन को देखते रहे। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने अफवाह को रोकने और सुरक्षा की दृष्टि से मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया था।
रोहतक रूट बंद, यूपी मार्ग के ट्रैफिक को किया डायवर्ट
पानीपत-रोहतक रूट की सब बसों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। पानीपत-शामली और हरिद्वार जाने वाली बसों का रूट करनाल वाया मेरठ से डायवर्ट कर दिया गया। रोहतक रूट के बंद होने पर यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ प्राइवेट बस चालक रोहतक पहुंचे। बलिदान दिवस को लेकर यात्री भी अपेक्षाकृत कम ही मिले।
सिवाह और अन्य स्थानों पर विशेष नजर
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने सिवाह समेत अन्य स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रखी। सीआरपीएफ और आरएएफ की कंपनियों ने अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में लगातार गश्त की। सबसे भारी सुरक्षा दिल्ली पैरलल नहर और सिवाह चौक पर रही। इसके अलावा जीटी रोड समेत अन्य दूसरे मार्गों पर भी पुख्ता प्रबंध थे।
चंदे का दिया गया ब्योरा
बलिदान दिवस पर संघर्ष समिति के सदस्य अज्ञैर चंदा कमेटी के अध्यक्ष रामचंद्र डाहर ने रविवार तक के 22 दिन के चंदे का पूरा ब्योरा उपस्थित लोगों को दिया। उन्होंने बताया कि पानीपत जिले के करीबन सभी गांवों ने कुछ न कुछ राशि चंदे के रूप में दी गई है।
उन्होंने बताया कि अब तक 32 लाख 40 हजार रुपये चंदा आया है। अकेले रविवार को सात लाख का चंदा जमा हुआ। उन्होंने बताया कि 3 लाख 50 हजार रुपये के करीब का खर्च स्टेडियम में लगाए गए टेंट पर किया गया है।
रोडवेज की बसों का लिया सहारा
सनौली-हरिद्वार रोड पर सुरक्षा के मद्देनजर तैनात किए गए हरियाणा पुलिस के जवानों के लिए हरियाणा रोडवेज की पानीपत डिपो की दो बसों का प्रबंध किया गया। पुलिस के जवान पानीपत डिपो की बस से धरनास्थल से 200 मीटर की दूरी पर खाली पड़े एक प्लाट में तैनात रहे।
दूसरी बस से जवान बबैल नाके पर पहुंचे। सनौली-हरिद्वार रोड पर फ्लाईओवर के नीचे के कट को भी ट्रैफिक अधिक होने के कारण खोल दिया गया। इस कट के खोलते ही ट्रैफिक सुचारु हो गया।
खांडा की रागिनियों पर निकले आंसू
बलिदान दिवस को लेकर स्टेडियम में कुछ देर तक लोग भावुक हो गए। आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में जब आजाद खांडा खेड़ी वाले ने रागिनी और गीत सुनाए तो लोग भावुक हो गए। कुछ महिलाएं अपने आंसू तक नहीं रोक पाईं। खांडा की आंखें भी नम दिखीं,
फिर भी आजाद ने अपने सूर को बनाए रखा। जान झोख दी जाट नैं, याद करेगा हरियाणा रे... और 36 बिरादरी के भाईचारे को लेकर रागिनी पसंद की गई।
जोश के साथ रखें होश
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय सचिव प्रताप सिंह दहिया ने कहा कि युवा जोश के साथ होश भी रखें। हुड़दंग करने वालों से बचें, ताकि बिरादरी का नाम खराब न हों। उन्होंने कहा कि रविवार को उनके धरने को पूरे 22 दिन हो गए हैं।
इसमें उन्होंने सिर्फ भाईचारे और एकता का परिचय दिया है। शांतिपूर्वक तरीके से धरना चल रहा है और आगे भी चलेगा। इसलिए सबसे अपील की है कि हड़दंगबाजी न करें, जिससे कौम का नाम बदनाम हों।
मोबाइल टॉयलेट का किया प्रबंध
स्टेडियम में चल रहे धरने को देखते हुए प्रशासन द्वारा स्टेडियम में मोबाइल टॉयलेट का उचित प्रबंध किया गया। प्रशासन के इस कदम को महिलाओं के साथ-साथ अन्य लोगों ने सराहा। इसके अलावा पानी के छह टैंक भी स्टेडियम में चारों तरफ खड़े किए गए। पीने के पानी के स्टाल भी लगाए गए।