पानीपत। क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने के आरोपों में घिरे पानीपत थर्मल पावर प्लांट की मुश्किलें बढ़ रही है। शुक्रवार को थर्मल पर एनजीटी में सुनवाई होनी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड थर्मल के खिलाफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के मामले में अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। सीपीसीबी ने अब तक तैयार की रिपोर्ट में ये दर्शाया है कि उन्होंने 24 नवंबर को थर्मल की राखी से प्रभावित गांव में श्रीराम लैब दिल्ली ने सात भूजल, पांच सैंपल फसलों के, पांच सैंपल मिट्टी के व पांच सैंपल हवा के लिए हैं। इनकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
सीपीसीबी ने स्वास्थ्य विभाग से ये रिपोर्ट मांगी है कि स्वास्थ्य केंद्रों में किस प्रकार के कितने रोगी आ रहे हैं। गांव सुताना, जाटल, खुखराना गांव व थर्मल कॉलोनी के एलर्जी, चर्म रोग, कैंसर व आंखों की बीमारी के मरीजों का डेटा लिया जा रहा है। सीपीसीबी ने सैंपल की रिपोर्ट आने तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जमा कराने के लिए एनजीटी से समय मांगा है, ताकि थर्मल पर हर्जाना तय किया जा सके। इसके लिए शुक्रवार को थर्मल पर एनजीटी में सुनवाई होगी।
13 मई 2019 को मुख्यमंत्री को दी गई थी शिकायत
जाटल ग्राम पंचायत ने 13 मई 2019 को मुख्यमंत्री को शिकायत दी थी। इस पर हरियाणा राज्य पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड ने 10 जून को चीफ इंजीनियर को नोटिस दिया। चीफ इंजीनियर ने 25 जून को जवाब दिया था। ग्राम पंचायत ने इसके बाद एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। गांव में आठ सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया। एचएसपीसीबी थर्मल पावर स्टेशन को प्रीवेंशन और कंट्रोल पॉल्यूशन एक्ट 1981 की धारा 31-ए के तहत 25 जून को भी नोटिस दे चुका है। अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी रिपोर्ट तैयार रहा है।
थर्मल के साथ बढ़ती गई राख डालने की झील
दरअसल, थर्मल की राख डालने के लिए झील बनाई गई थी। इसका पहला हिस्सा 1974 में शुरू हुआ, तब थर्मल की चार यूनिट से बिजली उत्पादन होता था। झील 768 एकड़ में थी। 2006 में थर्मल की पांच से आठ तक नई यूनिट शुरू की गई। इसमें 436 एकड़ में झील का नया हिस्सा बनाया गया। झील 1204 एकड़ तक फैल गई। अनुमान के अनुसार यह प्रदेश की सबसे बड़ी राख की झील है।
एचएसपीसीबी ने दी थी क्लीन चिट
जाटल पंचायत की शिकायत पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने बेशक थर्मल प्रशासन को राख उठाने और उसकी व्यवस्था पर क्लीन चिट दे दिया, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने थर्मल प्रशासन का एक्शन प्लान ठुकरा दिया था। एनजीटी ने थर्मल प्रशासन से कहा था कि वह कोई शार्ट टर्म एक्शन प्लान लेकर आए। इससे पहले थर्मल प्रशासन ने 10 साल में राख का डिस्पोजल करने का एक्शन प्लान एनजीटी को दिया था।
सीपीसीबी रिपोर्ट तैयार कर रही है
थर्मल के मामले की रिपोर्ट सीपीसीबी तैयार कर रही है। शुक्रवार को इस मामले की एनजीटी में सुनवाई होगी। एनजीटी के जो भी निर्देश होंगे उनके अनुसार काम किए जाएंगे। -कमलजीत सिंह, रिजनल ऑफिसर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड