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Panipat News: स्वास्थ्य विभाग ने खरीदी टीबी की आठ लाख दवा, राहत

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पानीपत। सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके अनुरूप जिले में लोगों की टीबी जांच भी हुई लेकिन अब यह अभियान कामयाब होता साकार नहीं हो रहा है। प्रदेश में टीबी की दवाओं की भारी कमी हो गई है। वेयर हाउस में टीबी की दवाएं है ही नहीं। स्वास्थ्य विभाग को अपने स्तर पर दवाएं खरीदनी पड़ रही है। अब स्वास्थ्य विभाग ने आठ लाख रुपये की एक माह की टीबी की दवा खरीदी है। अब सभी स्वास्थ्य केंद्रों में टीबी की दवा भिजवाई जाएगी। मरीजों को दवा के लिए संदेश भेज दिया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग के पास अब 60 हजार खुराक दवा का स्टॉक है। जिले में टीबी के 3676 रोगी हैं। हर माह टीबी से औसतन आठ लोगों की मौत हो जाती है। एक जनवरी तक अब तक जिले में टीबी के नए 1465 केस मिल चुके हैं। हर रोज टीबी के नए 12 केस मिल रहे हैं। पिछले एक साल में टीबी से 113 लोगों की मौत हो चुकी है।

पानीपत दाे माह से दवाओं की कमी से गुजर रहा है। जिले के कई सरकारी केंद्राें पर दवाओं का स्टाॅक खत्म हाे चुका है और अब मरीजाें के हिसाब से दवा सप्लाई की जा रही सी। पहले मरीजाें काे एक-एक माह तक की दवा एक साथ मिल जाती थी, अब मरीजाें काे चार दिन से लेकर एक सप्ताह तक की दवा दे रहे है, ताकि सभी मरीजाें काे दवा मिलती रहे। स्वास्थ्य विभाग प्रयास कर रहा है कि रोगियों का टीबी का कोर्स न टूटे। पानीपत टीबी के केस में प्रदेश में पांचवें स्थान पर है।
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एक मरीज पर 1200 रुपये की दवा हाेती है खर्च :-
एक टीबी मरीज की बात करें ताे सरकार उसपर औसतन एक माह की दवा पर 1200 रुपये खर्च कर रही है। वहीं हर मरीज के बैंक खाते में 500 रुपये भी उसके पाेषण के लिए दिए जाते हैं। पहले निजी अस्पतालाें में भी सरकारी दवाएं ही मरीज काे खिलाई जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हाेता। अगर निजी अस्पतालाें में मरीज मिलता है ताे वह मरीज का दवा काेर्स वहीं से शुरू कराते हैं। इससे मरीज काे आर्थिक खर्चा भी उठाना पड़ता है।

वर्जन-

डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि फिलहाल दवाओं की कमी है। अब 20 हजार खुराक मिली है। 22 हजार दवाओं की मांग भेजी गई है। उम्मीद है कि दवाओं की कमी जल्द पूरा होगी। उनका प्रयास है कि रोगियों का कोर्स बीच में न टूटे।
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