पानीपत। टीबी रोगियों की बेहतर सेहत के लिए रिफाइनरी ने सकारात्मक पहल किया है। स्वास्थ्य विभाग रिफाइनरी की मदद से जिले के लगभग तीन हजार टीबी रोगियों को गोद लेगा। इनको रिफाइनरी की मदद से हर माह न्यूट्रीशियन डाइट दी जाएगी ताकि टीबी रोगियों को आर्थिक परेशानी न हो और वह अपने स्वास्थ्य का बेहतर ध्यान रख सकें। इस मदद से स्वास्थ्य विभाग अब टीबी रोगियों को बेहतर पोषण करेगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार टीबी रोगियों को हर माह एक हजार रुपये पोषण भत्ते के रूप में दे रही है। 2024 में टीबी के 4950 केस मिले थे। इनमें से लगभग तीन हजार रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें 90 लोगों की मौत हो चुकी है। बाकी स्वस्थ हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। 2024 में प्रतिदिन 13 से अधिक मरीज मिले हैं। 2023 में प्रति माह 372 की औसत से टीबी के रोगी मिले थे लेकिन 2024 में यह बढ़कर 408 पहुंच गई है। टीबी के रोगियों की मौत के आंकड़े में कमी लाने में स्वास्थ्य विभाग काफी हद तक कामयाब हुआ है।
2023 में टीबी से 116 लोगों की मौत हुई थी। इस साल 70 लोगों की मौत हुई है। यह पिछले छह साल में यह दर सबसे कम है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग 100 दिन तक टीबी खोज अभियान भी चला रहा है। इस अभियान के शुरुआती दो माह में अब तक 25 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक टीबी के शिकार हो रहे हैं। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 720 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित भी किया है।
जिले में इलाज की व्यवस्था
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि रिफाइनरी की मदद से टीबी रोगियों को गोद लिया जाएगा। उन्हें हर माह न्यूट्रिशियन डाइट दी जाएगी। 2024 में जांच बढ़ने के साथ ही टीबी के रोगी भी बढ़े हैं । औद्योगिक क्षेत्रों में टीबी का अधिक खतरा है। टीबी खोज अभियान के दौरान जहां भी टीबी के संदिग्ध रोगी मिल रहे हैं। उन्हें जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया जा रहा है। टीबी रोगियों से अपील है कि वह इलाज बीच में न छोड़ें। जिन लोगों को नियमित खांसी है। जिनका वजन गिर रहा हो और अधिक पसीना आ रहा हो, वह अपनी टीबी की जांच अवश्य करवाएं। संपन्न लोगों से अपील है कि वह टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं।