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सामुदायिक केद्रं और आयुषमान योजना से जुड़े अस्पतालों में भी बनवा सकते है गोल्डन कार्ड

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अब आयुष्मान भारत योजना का पत्र मिलने के बाद पात्र अपने गांव के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व योजना से जुड़े अस्पतालों में गोल्डन कार्ड बनवा सकते हैं। आयुष्मान पत्र मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोग जागरूकता के अभाव में सिविल अस्पताल पहुंच जाते हैं और लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते है। इससे उनको काफी परेशानी तो होती है। इसके अलावा समय भी व्यर्थ होता है
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ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए कई किलोमीटर दूर अलग- अलग गांव से आना पड़ता है। पानीपत के सिविल अस्पताल में अलग- अलग गांव से आने के बाद दिन भर लाइन में लगकर कार्ड बनने का इतंजार करना पड़ता है। जिससे कर्मचारियों को क्रास चेकिंग करने में भीड़ की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । अधिकतर लोगों को पता ही नहीं है कि उनके गांव के सामुदायिक केंद्र में भी बन सकते है।
राहत-
डेढ़ साल के बेटे को मिला सफल इलाज : यशपाल
उसके डेढ़ साल के बेटे पारस को दिमागी बुखार हो गया था। जिसके कारण पारस की स्थिति नाजुक हो गई थी, लेकिन उसके बेटे का नाम आयुष्मान पत्र में नहीं था। जिसके बाद उसने अपने बेटे का नाम जुड़वा कर गोल्डन कार्ड बनवाया। 3 दिन आईसीयू में रहने के बाद अब वह बिल्कुल ठीक है। आयुष्मान योजना के तहत पारस का इलाज निजी अस्पताल में अच्छे से हो पाया है। वो दिहाड़ी कर अपने परिवार को पाल रहा है।
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-यशपाल निवासी ईदगाह कॉलोनी
परेशानी-
प्रेम का कहना है कि आयुष्मान कार्ड में प्रेम की जगह प्रेम सिंह आया हुआ है। इसे ठीक करवाने के लिए उसको कई चक्कर लगाने पड़ रहे है । आयुषमान गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए उसको सौदापुर से रोज आना पड़ता है। इससे रोज उसकी दिहाड़ी खराब हो रही है। वो काफी परेशान है।
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-प्रेम निवासी गांव सौदापुर
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