फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana Election: आसान नहीं पानीपत की लड़ाई... असंतुष्ट खड़ी कर रहे बाधाएं; निर्दलीय भी निर्णायक भूमिका में

Thu, 26 Sep 2024 10:34 AM IST
शाहरुख खान जगमहेंद्र सरोहा, अमर उजाला, पानीपत

सार

हरियाणा के पानीपत की लड़ाई आसान नहीं है। भाजपा और कांग्रेस के लिए असंतुष्ट बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। निर्दलीय भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। 
विज्ञापन
Haryana Election - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक नवंबर 1991 को करनाल से अलग होकर बने पानीपत में चुनावी माहौल पल-पल बदल रहा है। वर्ष 2019 में पानीपत शहरी और ग्रामीण सीट भाजपा, जबकि समालखा व इसराना कांग्रेस के खाते में गई थीं। 
विज्ञापन


इस बार चारों सीटों पर प्रतिद्वंद्वी कड़े मुकाबले में फंसे हैं। हालांकि दो सीटों पर भाजपा व दो पर कांग्रेस खुद को ज्यादा मजबूत मान रही है। पानीपत ग्रामीण और समालखा में निर्दलीय भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। 

2009 में हुए परिसीमन के बाद टेक्सटाइल के लिए विख्यात इस जिले में केवल चार सीटें ही बचीं। चारों सीटों पर भाजपा ने मजबूत चेहरों को उतारा है। पानीपत शहर में प्रमोद विज ने तो कमर कस रखी है पर ग्रामीण में महिपाल ढांडा को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 
विज्ञापन


प्रमोद विज के सामने कांग्रेस ने वरिंदर सिंह बुल्लेशाह पर दांव खेला है। प्रमोद पांच बार विधायक रह चुके अपने पिता फतेहचंंद विज की विरासत को बचाने में जुटे हैं, जबकि बुल्लेशाह नया चेहरा हैं। 
 

वह पूर्व परिवहन मंत्री बलबीर पाल के भाई हैं और उनके पिता भी यहां से विधायक रह चुके हैं। इन दोनों की लड़ाई में निर्णायक की भूमिका पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी निभा रही हैं। वह 2014 में भाजपा विधायक रह चुकी हैं। इस बार लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गईं और टिकट नहीं मिलने पर आजाद लड़ रही हैं।

पानीपत ग्रामीण हलके में भी निर्दलीय विजय जैन खेल बिगाड़ रहे हैं। भाजपा के पार्षद रहे विजय जैन को टिकट नहीं मिला तो वे कांग्रेस में चले गए और वहां भी अनदेखी होने पर वे निर्दलीय उतरे हैं। यहां भाजपा के महिपाल ढांडा के सामने जैन के अलावा युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन कुंडू दीवार बनकर खड़े हैं। कुंडू भूपेंद्र हुड्डा के नजदीकी हैं। वह लोकसभा चुनाव के बाद से ही इलाके में सक्रिय हो गए थे।

समालखा में भी कांटे की टक्कर

समालखा में भी कांग्रेस प्रत्याशी धर्म सिंह छौक्कर हुड्डा के करीबी हैं। उनको सबसे बड़ा सहारा अपने नाम व हुड्डा का है। वे हलके में लंबे समय से सक्रिय भी हैं। दूसरी ओर भाजपा के पूर्व सहकारिता मंत्री करतार सिंह भड़ाना के बेटे मनमोहन भड़ाना हाईकमान के साथ व अपनी मेहनत के बलबूते बराबरी पर आ गए हैं और मजबूत स्थिति पेश कर रहे हैं। यहां निर्दलीय प्रत्याशी रविंद्र मच्छरौली केवल वोट काटू की स्थिति में ही नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन

भाजपा को अपनों से ही खतरा

इसराना (आरक्षित) सीट पर कांग्रेस के विधायक बलबीर वाल्मीकि के सामने भाजपा के कृष्णलाल पंवार मैदान में हैं। यहां भाजपा को अपने ही पूर्व प्रदेश सचिव सत्यवान शेरा से सबसे ज्यादा खतरा है। टिकट नहीं मिलने पर वे निर्दलीय मैदान में उतर आए हैं और भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। हालांकि पंवार पिछली हार का बदला लेने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं। 2009 और 2014 में विधायक रहे पंवार को 2019 में हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने उनको राज्यसभा सदस्य बनाया है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें