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Panipat News: नशे की खेप एक से दूसरी जगह पहुंचाने वाले सरगना की तलाश में जुटी जीआरपी की टीमें

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अंबाला। नशा तस्करी को लेकर एक बार फिर गिरोह सक्रिय हो गए हैं। जीआरपी की प्राथमिक जांच में यह खुलासा हुआ है, वहीं नशे की खेप एक से दूसरी जगह पहुंचाने वाले सरगना की तलाश में जीआरपी टीमें जुट गई हैं ताकि नशे के इस नेटवर्क को तोड़ा जा सके और मुख्य आरोपी की धरपकड़ हो सके। 29 से 17 नवंबर तक तस्करी के चार मामले छावनी के जीआरपी थाने में दर्ज हो चुके हैं।
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मोबाइल नंबर बदल रहे
सरगना तक पहुंचने के लिए साइबर सैल की मदद से रिकॉर्ड खंगाला जा रहा। हालांकि सरगना के मोबाइल नंबर बदलने से उन तक पहुंचने में जीआरपी टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है, वहीं मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम से जो जानकारी जीआरपी तक पहुंच रही है। उसके हिसाब से कभी आरोपी की लोकेशन बिहार नजर आ रही है तो कभी मुंबई, ऐसे में एक ठिकाने की पहचान न होना भी आरोपी तक पहुंचने में परेशानी का सबब बना हुआ है। दूसरी बड़ी समस्या एक आईडी पर खरीदे गए सिम से जुड़ी है, इसकी पुख्ता जानकारी भी विभाग को नहीं मिल रही है क्योंकि नकली आधार कार्ड के सहारे यह पूरा खेल चल रहा है।

पहला मामला
घटना 29 अक्तूबर की है। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 2-3 पर बैठे एक आरोपी मोहन सिंह को सीआईए टीम ने काबू किया था। उसके पास से सीआईए ने एक किलो 152 ग्राम चरस बरामद की थी जोकि वो हिमाचल से लेकर आया था।
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दूसरा मामला
घटना 15 नवंबर की है। कुल्लू से चरस लेकर आए देवबंद मऊ उत्तर प्रदेश निवासी मोहित को सीआईए ने कैंट रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। आरोपी से तीन लाख रुपये की एक किलो 972 ग्राम चरस पकड़ी गई है। आ

तीसरा मामला

घटना 16 नवंबर की है। बिहार से गांजा की सप्लाई देने के लिए पंजाब जा रहे माधेपुरा बिहार निवासी राजा बाबू को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे से 80 हजार रुपये का 12.270 किलो गांजा बरामद किया गया था जोकि वह पंजाब के अलग-अलग ठिकानों पर सप्लाई देने के लिए जा रहा था।

चौथा मामला
घटना 17 नवंबर की है। बिहार से गांजा लेकर आए बेगूसराय निवासी जितो राम को जीआरपी ने कैंट स्टेशन से गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से सात किलो 620 ग्राम गांजा जब्त किया गया। पकड़े गए गांजे की कीमत लगभग 55 हजार रुपये आंकी गई थी।

आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीआईए और जीआरपी की टीमें जुटी हुई हैं, लेकिन तस्कर भी अब लगातार अपना नेटवर्क बदल रहे हैं। इससे आरोपियों के ठिकानों तक पहुंचने में थोड़ी दिक्कत हो रही है।
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- कुलदीप सिंह, जांच अधिकारी, जीआरपी।
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