मुझे बचपन से बगिया बनाने का शौक रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए मैंने स्कूल में ही निजी कोष से बगिया बना रखी है। यह बगिया सिर्फ पेड़-पौधों तक सीमित नहीं है। यह बगिया मेरे जीवन का अहम हिस्सा है। क्योंकि मैं और मेरे सहयोगी अध्यापक भी इनकी देखभाल करते हैं और विद्यालय में प्रत्येक बच्चे को पर्यावरण बचाव के लिए जागरूक करते हैं और इनके महत्व को विस्तार से बताते हैं।
अब मैं बड़ौली के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक हूं। साथ ही विद्यालय में इको क्लब का प्रभारी भी हूं। पिछले सप्ताह मैंने और अन्य अध्यापकों ने निजी कोष से लगभग 50 अशोका के पेड़ स्कूल की बगिया में लगाए हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण व विद्यालय का सुंदरीकरण भी बढ़ता है। मैं हर साल अपने शादी की वर्षगांठ व जन्मदिवस पर निजी कोष से विद्यालय में पेड़-पौधे लगाता हूं। पिछले महीने ही सरकारी नर्सरी से 180 पौधे लेकर आए थे। जो एक पेड़ मां के नाम मुहिम के तहत विद्यालय के 140 बच्चों को बांटे गए और शेष 40 पौधे स्कूल की बगिया में लगाए हैं। सभी अध्यापक सिर्फ पौधे लगाने तक नहीं बल्कि उनके पेड़ बनने तक देखभाल करते हैं। बगिया में तुलसी, एलोवेरा भी लगाए गए हैं।
प्रदीप मलिक, सेक्टर-आठ