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गीता जयंती महोत्सव : जगदगुरु शंकराचार्य के सान्निध्य में भूमि पूजन, आस्था का खूंटा गाड़ा

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कुरुक्षेत्र। ब्रह्मसरोवर तट पर स्थित श्री जयराम विद्यापीठ में मंगलवार को श्रद्धा, आस्था और परंपरा का संगम दिखाई दिया। पिछले चार दशकों से चली आ रही परंपरा के तहत गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ श्री शारदा पीठ श्रृंगेरी के जगदगुरु शंकराचार्य विधु शेखर भारती के सानिध्य में खूंटा गाड़ने से किया गया।
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शंकराचार्य ने विद्यापीठ परिसर स्थित श्री रामेश्वर महादेव मंदिर में विश्व के दुर्लभ स्फटिक मणि शिवलिंग पर विधिवत पूजा-अर्चना कर पुष्प अर्पित किए। तत्पश्चात उन्होंने गीता जयंती महोत्सव की शुरुआत के प्रतीक रूप में आस्था का खूंटा गाड़कर शुभारंभ किया। मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच विद्यापीठ प्रांगण गीता महोत्सव की पवित्रता से गूंज उठा। इससे पूर्व ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने मुख्य यज्ञशाला में संत-महापुरुषों, विद्वानों और ब्रह्मचारियों के साथ सभी देवी-देवताओं एवं भगवान श्रीराम के परम भक्त वीर हनुमान का आह्वान कर गीता जयंती महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुसार धार्मिक आयोजन संतों के आशीर्वाद से ही सफल होते हैं, क्योंकि जहां हनुमान विराजमान हों, वहां धर्म और विश्वास स्वतः स्थापित होता है।

ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि भगवान के आगमन से पूर्व प्रकाश फैलता है और आज जगदगुरु शंकराचार्य विधु शेखर भारती का विद्यापीठ में आगमन शुभ संकेत है। वर्ष 1994 में उनके गुरु जगदगुरु भारती तीर्थ ने भी विद्यापीठ में आगमन कर इस परंपरा को आशीर्वाद दिया था। शंकराचार्य विधु शेखर भारती ने कहा कि कुरुक्षेत्र वही पावन भूमि है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से पूरी मानवता को गीता का संदेश दिया। श्रीमद्भगवद्गीता संसार का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। क्योंकि इसमें जीवन का श्रेष्ठ मार्ग निहित है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गीता को पढ़ता और उसके अनुसार जीवन जीता है, वह सच्चा मानव कहलाता है। महंत बंसी पुरी ने कहा कि उनके आशीर्वाद से धर्मनगरी का हर कोना गीता के संदेश से आलोकित होगा। इस मौके पर विधायक अशोक अरोड़ा, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद, महंत बंसी पुरी, महंत महेश मुनि, महंत लक्ष्मी नारायण पुरी सहित विद्यापीठ के ट्रस्टी और बड़ी संख्या में संत-महापुरुष मौजूद रहे।
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विधु शेखर भारती ने किए मां भद्रकाली शक्तिपीठ के दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती मंगलवार को मां भद्रकाली शक्तिपीठ पहुंचे, जहां उन्होंने मां भद्रकाली जी के दर्शन किए। पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा व टीम शक्तिपीठ ने गुलाब के फूलों से शंकराचार्य का स्वागत किया।

शंकराचार्य ने श्री देवीकूप तीर्थ पर विधिवत पूजा-अर्चना, पंचदीप आरती और पंचमेवे-फलों का भोग अर्पित किया। उन्होंने मां को शृंगार चढ़ाया, अक्षय वटवृक्ष की परिक्रमा की और हवनकुंड में पूर्णाहुति दी। पीठाध्यक्ष ने उन्हें मां की लाल चुनरी, पुष्पमाला और प्रसाद भेंट कर आशीर्वाद लिया तथा आगामी महागौरव स्थल की जानकारी दी। शंकराचार्य ने कहा कि प्राचीन मंदिरों की गुरु गद्दी हमारी सनातन परंपरा का प्रतीक और आध्यात्मिकता का द्वार है। तत्पश्चात शंकराचार्य श्री कृष्ण संग्रहालय भी पहुंचे और कृष्ण लीलाओं को देखा।
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