पानीपत। औद्योगिक नगरी पानीपत में अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया गया। लाेगाें शोभायात्रा के साथ नाचते कूदते आबिर गुलाल उड़ाते नहर व यमुना पर पहुंचे। यहां अगले वर्ष जल्द आने की प्रार्थना के साथ गणेश की मूर्ति का विसर्जन किया गया। असंध रोड व गोहाना रोड के अलावा यमुना के सनौली घाट पर सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। असंध रोड पर शाम के समय जाम की स्थिति पैदा हो गई।
मंगलवार को अनंत चतुर्दशी पर गणेश उत्सव का अंतिम दिन रहा। इसके लिए दिनभर में दो मुहूर्त रहे। लोग सुबह ही दिल्ली पैरलल नहर और यमुना घाट पर पहुंचने लगे। आतिशबाजी के साथ गणेश की मूर्ति का विसर्जन किया। दोपहर बाद श्रद्धालु शोभायात्रा के साथ नाचते गाते पहुंचे। वे आबिर गुलाल उड़ा रहे थे। शाम को चार से छह बजे तक असंध रोड लंबा जाम लग गया। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद रास्ता साफ किया। गणेश के भक्त मस्ती में झूमते हुए चल रहे थे। गणपति के गीतों पर जमकर ठुमके लगाए।
पंडित प्रवीण शर्मा नेू बताया कि गणपति की मूर्ति विसर्जन में त्याग का भाव है। गणेश मूर्ति विसर्जन का अर्थ केवल मूर्ति को जल में मिलाना नहीं है। मूर्ति विसर्जन की ये प्रक्रिया समझाती है कि इस भौतिक दुनिया में हमने जो कुछ भी बनाया है, वह अस्थायी है। वह सब अति इसी तरह मिट्टी में मिल जाएगा। ऐसे में संसार की मोह माया में फंसने की बजाय अपनी आत्मा को साक्षी मानकर कार्य करना चाहिए। जब हम अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल कर संसार के मोह से मुक्त होकर इसे त्याग सकते हैं।