पानीपत। सर्व कर्मचारी संघ का जेल भरो आंदोलन रोडवेज यात्रियों और कार्यालय में काम के सिलसिले में पहुंचे लोगों पर भारी पड़ गया। यात्रियों को सड़क पर न बस मिली और न ही कार्यालय में कोई कर्मी। ऐसे में उनको मायूस होकर काफी दिक्कतों के बीच लौटना पड़ा।
वहीं यूनियन के बैनर तले करीब चार सौ सरकारी कर्मियों ने अपनी गिरफ्तारियां दी। पुलिस और प्रशासन इन कर्मियों की गिरफ्तारी करने में भी मात्र घोषणा तक सीमित रहा और कर्मियों को वहीं पर छोड़ने की घोषणा कर दी।
सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले सरकारी विभागों के कर्मियों ने जेल भरो आंदोलन के तहत लघु सचिवालय पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी और कर्मचारियों के हित की मांगों को लागू करने के बजाय केवल घोषणा ही करने का आरोप लगाया।
यूनियन नेताओं के जोरदार प्रदर्शन के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार नरेंद्र दलाल ने डीएसपी शहर जितेंद्र गहलावत की अगुवाई में यूनियन के सभी कर्मियों को गिरफ्तार करने और उनको वहीं पर ही छोड़ने की घोषणा की। इससे पहले यूनियन के बैनर तले सभी विभागों के कर्मी सिविल अस्पताल में पार्क में एकजुट हुए।
यहां पर सीटू, जनवादी महिला मोर्चा, एफएसआई और किसान सभा समेत कई ट्रेड यूनियनों ने सर्व कर्मचारी संघ के जेल भरो आंदोलन को अपना समर्थन दिया। यहां प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला प्रधान तेजपाल ने की और प्रदेश के वरिष्ठ उप प्रधान वीरेंद्र डंगवाल और सचिव सुरेश नौहरा की अगुवाई में प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पर पहुंचे। जिला प्रधान तेजपाल ने बताया कि जेल भरो आंदोलन में करीब चार सौ कर्मियों ने गिरफ्तारियां दी हैं।
यूनियन के बैनर तले सरकारी कर्मियों ने कांग्रेस सरकार के साथ भाजपा पर भी हमला बोला। वीरेंद्र डंगवाल ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लागू नहीं करना चाहती और बार-बार सहमति होने के बाद मांगों को लागू नहीं कर रही। जिससे कर्मियों में कांग्रेस सरकार के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। सरकार और उनके नुमाइंदे वोट मांगने फिर से जनता के बीच आएंगे। लोगों को उनसे जवाब मांगना होगा। जिला प्रधान तेजपाल ने कहा कि यूनियन सरकार को एक बार फिर से चेतावनी दे रही है। रोडवेज नेता राजपाल ने कहा कि कांग्रेस के साथ भाजपा की सरकार भी थ्री पी की नीति को लागू कर रही है। जिससे कर्मियों मेें रोष व्याप्त है। इस मौके पर सुरेश कुमार, धर्मबीर सारसर, सीटू नेता सुनील दत्त, डा. सुरेंद्र मलिक, भलेराम, दलबीर सिंह, रामफल गुर्जर, ईश्वर सिंह, अनूप मलिक, सुलतान देशवाल, रविंद्र कुमार, सीताराम, जगत सिंह, आनंद ज्वाहरा, जय सिंह, महेंद्र सिंह, हरिसिंह, जितेंद्र मलिक, सतबीर कुंडू, महाबीर मलिक, सुनील कुमार, चरण सिंह और मुकेश मौजूद रहे।
ये रही कर्मियों की मांगें
यूनियन ने अपनी मांगों को प्रशासन के मार्फत फिर से सरकार को सौंपा। सरकारी कार्यालयों में कच्चे कमर्चारियों को दो साल के सेवाकाल के बाद बिना शर्त पक्का किया जाएं और तब तक उनको 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए। आंगनबाड़ी, आशा वर्कर, मिड-डे मील और आरसीएच सहित सभी परियोजनाओं के कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। स्थायी काम पर स्थायी भर्ती, न्यूनतम वेतन, काम के घंटे, ईएसआई, पीएफ सहित सभी कानूनों का दृढ़ता से पालन किया जाए। कर्मियों को केंद्र के समान ग्रेड पे और वेतन भत्ते दिए जाए। लिपिक कर्मचारियों को पंजाब के समान ग्रेड-पे दिए जाए। सरकार वेतन विसंगतियों को दूर करें। महंगाई के अनुरूप मेडिकल भत्ता, शिक्षा भत्ता और मकान किराया भत्ता दिया जाए। आउटसोर्सिंग, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और ठेका अनुबंध सहित निजीकरण की नीतियों को रद्द किया जाए। विभागों में खाली पड़े पदों को स्थायी भर्ती के साथ भरा जाए।
पुलिस के पास मिली मात्र दो ही बसें
सर्व कर्मचारी संघ के जल भरो आंदोलन में पुलिसकर्मी तैनात तो हो गए, लेकिन गिरफ्तार करने के बाद उनको ले जाने के लिए पर्याप्त गाड़ी के प्रबंध नहीं कर सकी। पुलिस के पास एक बड़ी और दो छोटी बस ही थी। आंदोलनकारियों की संख्या को देखकर भी पुलिस और प्रशासन की सांसें फूलीं रही।
यूनियन ने मांगी जेल में रोटी, प्रशासन वहीं पर छोड़ा
यूनियन के बैनर तले सरकारी कर्मी जेल में डालने और सप्ताह-10 दिन वहीं पर रोटी देने की मांग करते रहे, लेकिन प्रशासन ने उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार नरेंद्र दलाल ने कर्मियों को गिरफ्तार करने और वहीं छोड़ने की घोषणा कर दी। प्रशासन और पुलिस की बात सुनकर कर्मी भी हैरान रह गए और गिरफ्तार होने की नीयत से पहुंचे कर्मियों को ऐसे ही लौटना पड़ा।
बसों को लेकर सड़क पर भटकते रहे यात्री
पानीपत डिपो की 40 बसों के प्रदेश स्तरीय समारोह में जाने और यूनियन के काफी नेताओं के आंदोलन में शामिल होने से बस पर्याप्त संख्या में नहीं चल सकी। जिसके चलते यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। बस स्टैंड और इसके आसपास लंबी दूरी के यात्रियों को भी घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। वहीं स्थानीय मार्गों पर बसें न मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी रही। यात्रियों को निजी वाहनों का सहारा लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। यहीं हाल नगर निगम और बिजली निगम जैसे दूसरे विभागों का रहा। यहां पर भी कर्मी नहीं मिल सके और उनको वापस लौटना पड़ा।