पानीपत। रक्षाबंधन पर्व को लेकर बहनें काफी उत्साहित हैं। वहीं शास्त्रों के अनुसार अगर शुभ समय में कोई पर्व या कार्य किया जाए तो उसमें हमेशा लाभ ही होता है।
वैसे ही रक्षाबंधन पर्व के दिन अगर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर शुभ समय में राखी बांधती है तो भाइयाें के ऊपर हर आने वाली विपत्तियों से बचाव रहता है।
रक्षाबंधन पर्व पर बहनें अपने भाइयाें की आयु वृद्धि के लिए कामना करती है लेकिन इसके लिए अगर शुभ समय में त्योहार को मनाया जाए तो इससे व्यक्ति विपत्तियों से तो बचाता ही है साथ ही भाई-बहन में स्नेह बढ़ता है। अब कि बार 10 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा।
पंडित रामप्रकाश पाठक ने बताया कि पर्व मनाने का शुभ समय सुबह 10 बजे से 11 बजे तक के बीच ही है। इस बीच बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर त्योहार मना सकती है, उसके बाद दोपहर एक बजे के बाद ही रक्षाबंधन पर्व मनाए। दोपहर 1 बजे से उद्रकाल शुरू हो जाएगा। शुभ में बहनें भाइयाें को राखी बांधे तो भाइयाें के सिर हुए संकट से रक्षा होती है।
रक्षाबंधन पर्व के दिन सूर्य उदय होते ही भद्रा यानि उद्रकाल शुरू हो जाएगा, ऐसे में पर्व मनाना अच्छा नहीं माना जाता है। भद्रा का प्रभाव सुबह 10 बजे से पहले और उसके बाद 11 बजे के बाद से दोपहर 1 बजे तक रहेगा। दोपहर के बाद बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती है।
पं. रामप्रकाश पाठक ने बताया कि पुष्पकाल में रक्षाबंधन पर्व मनाने से व्यक्ति विपत्ति से बचाव रहता है। वहीं भद्रा यानि उद्रकाल में रक्षाबंधन पर्व मनाना अच्छा नहीं माना जाता है। दोपहर एक बजे के बाद पुष्यकाल शुरू हो जाएगा जोकि पर्व के लिए शुभ समय होगा। दोपहर के बाद बहनें भाइयाें की कलाई पर राखी बांधे तो शुभ होगा, उसके के ऊपर आई हुए विपत्तियां दूर होगीं।