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Panipat News: जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में धोखाधड़ी का केस

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पानीपत। फर्जी जाति प्रमाण पत्र में फंसी जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर पद से हटाने के पौने दो महीने बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। थाना शहर पुलिस में उनके खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और षड्यंत्र रचने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि काजल देशवाल सामान्य जाति से हैं और उन्होंने जिला परिषद का चुनाव बीए-ए आरक्षित वार्ड-13 से चुनाव लड़ा है। वे 15 जून 2024 को भाजपा की ही अध्यक्ष ज्योति शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास कर जिला परिषद की अध्यक्ष बनी थीं।
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जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष ज्योति शर्मा के पति भाजपा नेता प्रदीप शर्मा ने मार्च 2024 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शिकायत दी थी। उन्होंने काजल देशवाल पर (बीसी-ए) का फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर जिला परिषद के वार्ड-13 से चुनाव लड़ने के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री ने इसकी जांच के पंचायत विभाग को आदेश दिए थे। पंचायत विभाग के निदेशक ने छह अप्रैल काे उपायुक्त पानीपत को पत्र लिखकर मामले की जांच के आदेश दिए थे। काजल देशवाल का मायका यूपी के सहानपुर के धुन्ना गांव में है। प्रशासन ने सहारनपुर डीएम को जांच के लिए लिखा। सहारनपुर के डीएम ने 88 पेज की रिपोर्ट बनाकर दी। जिसमें काजल देशवाल को कश्यप राजपूत जाति से मिली।
यूपी में कश्यप राजपूत सामान्य वर्ग में आते हैं। जबकि उन्होंने कहार जाति से बीसी-ए का प्रमाण-पत्र बनवाया था। इस बीच काजल देशवाल का प्रमाण-पत्र पानीपत में ही बनाए जाने की बात सामने आई। अतिरिक्त उपायुक्त डॉ. पंकज ने 26 जून को उनका प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया। पंचायत विभाग के निदेशक के सामने 27 को पेशी थी। निदेशक ने काजल देशवाल को जिला परिषद के अध्यक्ष पद से हटा दिया। काजल देशवाल ने निदेशक के फैसले के खिलाफ एसीएस को अपील की थी। जिसमें सुनवाई चल रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी। इसी बीच उनके खिलाफ थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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पानीपत जिला परिषद का वार्ड-13 पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित था। काजल देशवाल ने इस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन में खुद को कश्यप राजपूत बताया। इसके साथ ही एक जाति प्रमाणपत्र भी लगाया गया। उसमें उल्लेख था कि कश्यप राजपूत पिछड़ा वर्ग में आते हैं। जबकि जांच में यह सामने आया कि उत्तर प्रदेश, जहां काजल का जन्म हुआ, वहां कश्यप राजपूत पिछड़ा वर्ग की बजाय सामान्य श्रेणी में आते हैं। डीएम की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि यह जाति प्रमाणपत्र अवैध है। इसी आधार पर काजल की सदस्यता और चेयरपर्सन की कुर्सी चली गई।

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एक के खिलाफ अविश्वास, दूसरी को हटाया

ज्योति शर्मा 27 दिसंबर 2022 को भाजपा के समर्थन से जिला परिषद की अध्यक्ष चुनी गई थीं। उनके खिलाफ पार्षद लामबंद हो गए थे। उनके खिलाफ छह मार्च 2024 को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। ज्योति ने भी कुछ देर पहले इस्तीफा दे दिया था। उस समय 17 में से 13 पार्षद उनके खिलाफ थे। काजल देशवाल को 14 जून को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना। वे एक साल ही इस पद पर रह पाईं।

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इन धाराओं में उम्रकैद तक की सजा
एडवोकेट जुगविंद्र मलिक ने बताया कि आईपीसी की धारा 420 किसी के साथ धोखाधड़ी करने पर लगती है। इसमें मजिस्ट्रेट ट्रायल होती है और सात साल की सजा होती है। वहीं आईपीसी की 467, 468 और 471 फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार करना और उसके प्रयोग करने में लगती है। इनमें आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा दी जा सकती है। यह एक गंभीर अपराध है।


वर्जन :
पांच महीने की जांच में एक नोटिस मिला है। उसमें वकील ने अपना जवाब दिया था। उनको अब तक जांच में शामिल नहीं किया गया है। अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने के मामले की अपील एसीएस को की गई है। इस मामले में 26 अगस्त को सुनवाई है। वे एसीएस के फैसले का इंंतजार कर रहे हैं। मुकदमा दर्ज कराने की कानूनी लड़ाई लड़ेंगी।
काजल देशवाल, अध्यक्ष, जिला परिषद पानीपत।

वर्जन :
पुलिस ने शिकायत के आधार पर जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले में शामिल अन्य लोगों को भी जांच में शामिल करेगी।
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दीवान, प्रभारी, थाना शहर।
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