समालखा। नई अनाज मंडी में शनिवार को जैन मुनि उपेंद्र मुनि ने क्षमा को ज्ञान का आभूषण बताया। उन्होंने कहा कि एक ज्ञानी व्यक्ति की पहचान केवल उसके ज्ञान से नहीं होती बल्कि उसकी क्षमा करने की क्षमता से भी होती है। ज्ञान तो बहुत लोग अर्जित कर सकते हैं लेकिन क्षमा का गुण वास्तव में उस ज्ञान को पूर्ण और शोभायमान बनाता है। यह सूक्ति एक क्रम को दर्शाती है जहां प्रत्येक गुण अपने से पिछले गुण की शोभा बढ़ाता है। मनुष्य का आभूषण उसका रूप और रूप का आभूषण गुण और गुण का आभूषण ज्ञान होता है और ज्ञान का आभूषण क्षमा होता है।
सच्चा ज्ञान व्यक्ति को विनम्र बनाता है। अगर किसी ज्ञानी व्यक्ति में अहंकार है और वह क्षमा नहीं कर सकता तो उसका ज्ञान अधूरा माना जाता है। क्षमा करना विनम्रता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। क्षमा को वीरों का आभूषण भी कहा जाता है क्षमा वीरस्य भूषणम्। इसका मतलब यह है कि क्षमा करना कमजोर व्यक्ति का काम नहीं बल्कि उस व्यक्ति का काम है जो शक्तिशाली होने के बाद भी प्रतिशोध की भावना को छोड़ देता है। भावनात्मक और आध्यात्मिक शुद्धि क्षमा अपने भीतर के क्रोध, द्वेष और नकारात्मक भावनाओं को समाप्त करती है।
इससे मन शांत और निर्मल होता है जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक है। ज्ञान का व्यावहारिक अनुप्रयोग ज्ञान केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित नहीं होता। जब व्यक्ति अपने ज्ञान का उपयोग अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने और दूसरों के प्रति दया का भाव रखने में करता है तो उसका ज्ञान सार्थक होता है। क्षमा इसी ज्ञान का एक व्यावहारिक रूप है।