पानीपत के संजय चौक स्थित हैदराबादी अस्पताल की तीन मंजिला ओपीडी में आग से भगदड़ मच गई। आगजनी में एक कर्मचारी झुलस गया और करीब 500 मरीज और डॉक्टर बाल-बाल बच गए।
अस्पताल के गेट पर पहुंची दमकल गाड़ी तंग रास्ते के कारण घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकी। अस्पताल में रखे एंटी फायर सिलेंडरों की मदद से करीब पौन घंटे में आग पर काबू पाया। फिलहाल आग लगने के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं।
आगजनी की घटना शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे हुई। हैदराबादी अस्पताल की तीन मंजिला ओपीडी में डॉक्टर मरीजों का चेकअप कर रहे थे और मरीज अपने नंबर के इंतजार में थे। इसी समय ओपीडी के बाहर एक कोने में आग भड़क गई।
आग की सूचना मिलने पर डॉक्टर और मरीज सुरक्षित स्थान की ओर दौड़ पड़े। इसी आपाधापी में पवन नाम का एक कर्मचारी ऊपर से जलती वस्तु गिरने से घायल और झुलस गया। वह अस्पताल का कर्मचारी बताया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने आगजनी की सूचना दमकल विभाग को दी।
सूचना मिलने पर दमकलकर्मी दो गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे। गेट के रास्ते की वजह से गाड़ी आगे नहीं जा सकी। अस्पताल में रखे एंटी फायर सिलेंडरों की मदद से करीब पौन घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान आग मैदानी तल से दूसरी मंजिल तक पहुंच गई थी।
पुलिस ने खाली कराया अस्पताल
अस्पताल की ओपीडी में आगजनी की सूचना मिलने पर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी ओपीडी को खाली करा दिया। मरीज भी आग लगने की सूचना मिलने पर भाग खड़े हुए और सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए। कई मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पांच सौ से अधिक लोग बाल-बाल बचे
शनिवार सुबह हैदराबादी अस्पताल की ओपीडी में करीब पांच सौ मरीज और उनके परिजन मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मैदानी तल छह डॉक्टर और प्रथम तल पर दो डॉक्टर ओपीडी करते हैं। अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बच्चों का आईसीयू और नर्सरी है। इसमें करीब एक दर्जन बच्चे थे। वहीं डॉक्टर के पास दोपहर तक पांच सौ मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। ओपीडी में 15 से 20 डॉक्टर और स्टाफ भी रहता है। आगजनी की घटना के बाद उनकी सांसें अटक गईं।
तेल के ड्रमों ने बढ़ाई सबकी धड़कन
हैदराबादी अस्पताल के डिजाइन में प्रयुक्त सामग्री आग लगते ही मोम की तरफ पिघलकर नीचे गिरने लगा। यहां पर डीजल के भरे एक दर्जन ड्रमों को देख हर किसी की धड़कन बढ़ गई। वहां पहुंचे पुलिस और अस्पताल कर्मियों ने समझदारी दिखाते हुए ड्रमों को वहां से हटाया और फिर एंटी फायर सिलेंडर की मदद से काबू पाया।
आगजनी का यह हो सकता है कारण
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ओपीडी के इस हिस्से में बिजली का कोई कनेक्शन या तार नहीं है। ऐसे में शार्ट सर्किट नहीं हो सकता है। बताया जा रहा है कि डिजाइन बनाते समय अस्पताल की दीवार और डिजाइन के बीच जगह छोड़ दी गई। प्रबंधन कमेटी ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। ऐसा माना जा रहा है कि यहां पर कर्मियों और मरीजों ने बचा सामान डालना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने शक जाहिर किया कि किसी ने सुलगती बीड़ी को यहां पर डाल दिया। इससे कागज और झाड़ू के अवशेषों ने आग पकड़ ली।
पार्किंग में उलझ गई दमकल गाड़ियां
हैदराबादी अस्पताल में आगजनी की सूचना मिलने पर पहुंची दमकलकर्मी अस्पताल के डिजाइन और पार्किंग में फंसकर रह गए। दमकलकर्मियों ने गाड़ी के नहीं पहुंच पाने पर अस्पताल में रखे सिलेंडरों की मदद से आग पर काबू करने का प्रयास किया। सूचना मिलने पर अस्पताल में दो गाड़ियों के साथ दमकलकर्मी पहुंच गए थे। अस्पताल में प्रवेश करने के बाद घटनास्थल की तरफ जाने लगे तो अस्पताल की बिल्डिंग के पिलर से गाड़ी टकरा गई और आगे नहीं जा सकी। चालक ने गाड़ी को मोड़ने का प्रयास किया तो पार्किंग में खड़े वाहन बाधा बन गए।
वर्जन
हैदराबादी अस्पताल की ओपीडी में फायर हो गई थी। इसमें किसी को गंभीर चोट नहीं लगी है। पुलिस ने मौके पर पहुंच मरीजों को ओपीडी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। आग पर जल्द ही काबू पा लिया था।
दीपक, प्रभारी, किला चौकी, पानीपत