माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। कोरोना से जंग जीतने के बाद लोग मोटापे और अवसाद के शिकार होने लगे हैं। इसके अलावा अस्थमा, बदन दर्द व अवसाद के मरीज भी बढ़े हैं। सिविल अस्पताल में इसके लिए पोस्ट कोविड सेंटर बनाया गया है। सेंटर की इंचार्ज डॉ. अनुराधा को नियुक्त किया गया है। हर रोज सेंटर में 10-15 ओपीडी हो रही हैं, जबकि मई और अप्रैल में ओपीडी की संख्या 35-40 के बीच थी।
मोटापे और अवसाद के मरीजों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें फिजियोथेरेपी, योग, अभ्यास और खानपान से संबंधित जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें मानसिक तनाव से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। अन्य मरीजों को भी बीमारी से उबरने के लिए सलाह दी जा रही है। डाक्टरों का कहना है कि हम कोरोना को जागरूकता से ही हरा सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वो कोविड गाइडलाइन का पालन करते रहे। ताकि सभी सुरक्षित रह सके। ----
केस-1 ...फूलती है सांस, 13 किलो बढ़ा वजन
सेक्टर 6 में रहने वाले 53 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि वो मई में कोरोना संक्रमित हो गए थे। 15 मई को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। इसके बाद उनका एकाएक वजन बढ़ने लगा। पहले उनका वजन 72 किलोग्राम था अब 85 किलोग्राम हो चुका है। इसके साथ साथ उनको सांस लेने में और सीढ़ियां चढ़ने में भी काफी दिक्कत होती है। डॉक्टर बताते हैं कि स्टेरॉयड के इस्तेमाल से ये शरीर पर प्रभाव पड़ा है। सिविल अस्पताल की महिला डॉक्टर बताती है कि कोविड से ठीक होने के बाद उनकी बॉडी पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। पहले उनका वजन कम हो गया था अब एकाएक बढ़ गया। शरीर में थकावट महसूस होती है।
केस-2... अब लगातार कमजोर महसूस होती है
सिविल अस्पताल में काम करने वाली स्टाफ नर्स ने कहा कि अप्रैल में कोरोना से ठीक होने के बाद उनको अब भी सांस लेने में दिक्कत है। उनको काफी थकावट महसूस होती है। शरीर में कमजोरी महसूस होती है। वो लगातार इसका भी ट्रीटमेंट ले रही है।
केस-3 ...दमे की परेशानी बढ़ी, आंखों में दर्द शुरू
मॉडल टाउन के एक व्यापारी ने बताया कि कोरोना को हराने के बाद उनकी आंखों में दर्द शुरू हो गया था। उसने इसका ट्रीटमेंट कराया, लेकिन अब दमा की परेशानी बढ़ गई है। कुछ ही दूर चलने पर सांसे फूलने लगती है। कोविड का प्रभाव अब भी नजर आता है।
सबकी बॉडी अलग-अलग रिएक्ट करती है। अलग-अलग प्रकार के रोगी आ रहे हैं, किसी का वजन बढ़ा तो किसी का कम भी हुआ है। कोरोना वायरस का इंफेक्ट कुछ दिन तक रहता है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं, विशेषज्ञ डाक्टरों की सलाह पर इलाज जारी रखें। इस वायरस के असर से फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और मरीज निमोनिया के भी शिकार हो जाते हैं।
- डॉ. अनुराधा, इंचार्ज पोस्ट कोविड सेंटर, सिविल अस्पताल