माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अनाज मंडियों में धान का उठान धीमा होने से परेशानी बढ़ती जा रही है। जिले की सात मंडियों में अब तक 1,22,578 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है, लेकिन खरीद के बाद भी बड़ी मात्रा में धान मंडियों में पड़ा है। कट्टों के ढेर लगे हैं और सुखाने के लिए धान मंडियों में फैलाया गया है। धान का उठान न होने से किसान परेशान हैं।
उनका कहना है कि राइस मिलों में गाड़ियां कई-कई दिन तक खाली नहीं होने से ट्रांसपोर्ट के लिए वाहन भी नहीं मिल रहे हैं। पानीपत से पांच दिन पहले गई तीन गाड़ियां अब तक राइस मिलों में खाली नहीं हुई हैं।
जिले में आई धान में 7,160 मीट्रिक टन पीआर और 1,15,418 मीट्रिक टन 1509 किस्म शामिल है। मिलर्स और निजी व्यापारियों ने 1,15,038 मीट्रिक टन धान खरीदी है। वहीं, हैफेड ने 1,184.2 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 3,281.5 मीट्रिक टन पीआर धान की खरीद की है। बासमती, 1121, सरबती और मुच्छल किस्म की आवक अभी दर्ज नहीं हुई है।
मंडीवार आवक का ब्योरा : समालखा मंडी में सबसे अधिक 68,207 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें 151 मीट्रिक टन पीआर और 68,056 मीट्रिक टन 1509 किस्म है।पानीपत मंडी में 22,476 मीट्रिक टन आवक दर्ज की है। इसमें 1,156 मीट्रिक टन पीआर और 21,320 मीट्रिक टन 1509 किस्म है।
मतलौडा मंडी में 10,597 मीट्रिक टन धान आई है। इसमें 3,022 मीट्रिक टन पीआर और 7,575 मीट्रिक टन 1509 किस्म है। इसराना मंडी में 9,961 मीट्रिक टन आवक हुई है। इसमें 1,677 मीट्रिक टन पीआर और 8,384 मीट्रिक टन 1509 किस्म आई है।
बाबरपुर मंडी में 7,067 मीट्रिक टन आवक दर्ज की है। इसमें 504 मीट्रिक टन पीआर और 6,563 मीट्रिक टन 1509 किस्म है। बापौली मंडी में 4,270 मीट्रिक टन धान आई है। इसमें 650 मीट्रिक टन पीआर और 3,620 मीट्रिक टन 1509 किस्म की आवक हुई है। सनौली मंडी में आवक नहीं हुई है।
आज मंत्री करेंगे दौरा : कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा बुधवार को पानीपत जिले की विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा करेंगे।
जिले की मंडियों में खरीद सुचारु रूप से चल रही है। मंडियों में उठान को और बढ़ाया जाएगा। संबंधित अधिकारी व ठेकेदार को इसके आदेश दिए गए हैं। वे खुद भी मौका मुआयना कर चुके हैं। -डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त।
किसानों ने अनदेखी को बताया चिंताजनक
इसराना के किसान राममेहर ने बताया कि वे चार दिन पहले धान बेचकर गए थे। नियमानुसार 72 घंटे में भुगतान मिलना चाहिए। इसमें नया नियम हर किसी के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। किसान को सेलर में धान उतरने के बाद ही पैसे मिलते हैं।
मतलौडा के दिलबाग सिंह ने बताया कि धान बिकने के बाद भी उठान न होने से उनका भुगतान अटका हुआ है। ट्रांसपोर्टरों की कमी का बहाना बनाकर एजेंसियां लिफ्टिंग टाल रही हैं। इससे किसानों को मंडी में ही रातें काटनी पड़ रही हैं। उनको मंडी में किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही है।