माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। गोल्डन ग्रुप को स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी को गिराने के मामले में सिविल कोर्ट ने स्टे दे दिया है। फैक्टरी मालिक ने कोर्ट से स्टे मिलने के बाद राहत की सांस ली है। वहीं नगर निगम अधिकारियों की मुश्किल बढ़ गई हैं। इन सबके बीच निगम आयुक्त ने इंजीनियरिंग शाखा से जवाब मांगा है। अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई करने की जानकारी दी है।
सिविल जज जूनियर डिवीजन विकास की कोर्ट में मंगलवार को गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी गिराने के मामले में सुनवाई की। फैक्टरी मालिक की तरफ से एडवोकेट बलराज खर्ब और निगम की तरफ से सुशील गौड़ ने अपना-अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनते हुए फैक्टरी मालिक को स्टे दे दिया। कोर्ट में इसमें अगली सुनवाई 3 अक्तूबर को होगी। फैक्टरी मालिक अक्षय चुघ ने बताया कि कोर्ट ने फैक्टरी पर स्टे दिया है। इसके ऑर्डर की कॉपी अभी तक नहीं मिली है। वे इसके बाद ही इसमें कुछ कह पाएंगे। वे कोर्ट में अपनी बात को प्रमुखता के साथ रखेंगे। वहीं नगर निगम आयुक्त डॉ. पंकज ने फैक्टरी गिराने के मामले में एक्सईएन गोपाल कलावत और एटीपी दीपक राणा से बात की। उन्होंने बताया कि फैक्टरी मालिक को नोटिस दिया गया था। इसके आधार पर अगला हिस्सा ही गिराया गया था। उनको इसके आगे की कार्रवाई की जानकारी नहीं है।
19 सितंबर को की थी कार्रवाई
नगर निगम ने 19 सितंबर को गोल्डन ग्रुप की स्वास्तिक रोड स्थित गोल्डन टैरी टॉवल फैक्टरी के अगले हिस्से का करीब 10 फीट छज्जा तोड़ दिया था। निगम का दावा था कि इसमें अतिक्रमण किया गया। इसके अगले दिन आधी रात को फिर से जेसीबी लेकर पहुंचे। गोल्डन ग्रुप के मालिक वेदप्रकाश चुघ का आरोप है कि नगर निगम अधिकारियों ने मनमर्जी से आधी रात को फैक्टरी तोड़ दी। उन्हाेंने बताया कि उनकी फैक्टरी की रजिस्ट्री 917 गज की है, जबकि उन्होंने 870 गज में ही निर्माण किया है। उन्होंने इस मामले में कोर्ट में केस दायर किया है। इसी मामले में विधायक प्रमोद विज और हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के जिला प्रधान विनोद धमीजा के बीच काफी देर तक कहासुनी हुई थी।