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निगम ने शौचालय बनवाने को दिए 14 में सिर्फ 2 हजार रुपये दिए, वह भी लाभार्थी को नहीं मिले

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाई गई हर घर शौचालय स्कीम में एकबार फिर से गड़बड़झाला सामने आया है। निगम ने चार साल पहले लाभार्थियों के नाम से पैसे तो आवंटित कर दिए, लेकिन वे आज तक उन्हें नहीं मिल पाए हैं। नतीजा शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो सका। सवाल यह उठ रहा है कि अगर निगम ने पैसे दिए और लाभार्थी को नहीं मिले तो आखिर गए कहां। निगम के खातों के अनुसार दिए गए दो हजार रुपये भी ट्रेस नहीं हो पा रहे हैं कि आखिर वे किसके खाते में पहुंच गए।
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नगर निगम का कहना है कि पांच साल पहले चेक के जरिए कुछ लाभार्थियों को पेमेंट किया गया था, जो असल लाभार्थियों के खाते में गई है या नहीं, इसे ट्रेस नहीं किया जा सकता है। ऐसा ही एक मामला वार्ड नंबर-2 नूरवाला स्थित वाल्मीकि बस्ती की गुलशन कुमारी का सामने आया, जिसे निगम ने पहली किस्त के 7 हजार की जगह सिर्फ 2 हजार रुपये तो दिए, लेकिन ये पैसे आज तक लाभार्थी के खाते में नहीं आ सके। इसके लिए आवेदनकर्ता पिछले तीन साल से लगातार निगम कार्यालय के चक्कर काट रही है। पैसों की कमी से शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। इससे पहले भी तहसील कैंप के सुधीर नगर निवासी नरेश कुमार निगम पर आरोप लगा चुके हैं, जिसमें उन्हें इस स्कीम का लाभ तो दिया नहीं गया, उनकी शिकायत को भी फर्जी हस्ताक्षर कर निस्तारित कर दिया गया। इसका खुलासा तब हुआ, जब शिकायत निस्तारण की वेरिफिकेशन हुई।
कई बार लिए फोटो, किया वेरिफाई, पैसे के अभाव में किराए पर लिया मकान-
वृद्धा गुलशन ने बताया कि पैसे के अभाव में उन्होंने शौचालय तो बनवा लिया, लेकिन ये अभी तक चालू नहीं हो पाया है। इस वजह से किराए के मकान में रहना पड़ रहा है। समस्या समाधान के लिए तीन साल से लगातार निगम के चक्कर काट रहीं हूं, लेकिन हल नहीं निकल रहा।
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-1.3 करोड़ का बजट आया, लेकिन सही बंट नहीं पाया
सन 2014 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने इंडीविजुअल हाउस होल्ड लैटरीन स्कीम के अंतर्गत 1.3 करोड़ का बजट दिया था। निगम के पास साढ़े चार हजार आवेदन भी आए थे, जिनमें से 1950 आवेदन स्वीकार किए गए, लेकिन करीब 1650 आवेदनकर्ताओं को महज 2 हजार रुपये ही दिए गए। बाकी करीब 300 आवेदनकर्ताओं में से किसी को 3 तो किसी को 5 हजार रुपये ही मिल पाए।
वेरिफिकेशन का काम अकाउंट ब्रांच को सौंपा गया है : सीटीएल
लाभार्थियों को पहली किस्त के 7 हजार दिए जाने थे। किन्हीं कारणों से किसी को दो तो किसी को पांच हजार रुपये दिए गए। शिकायतें मिल रहीं हैं कि कई लाभार्थियों को ये भी नहीं मिले हैं। इनका भुगतान उस समय चेक से किया गया है। अब इसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए अकाउंट ब्रांच को ये काम सौंपा गया है, जिसमें समय लग रहा है।
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- विजय सैनी, सिटी टीम लीडर, नगर निगम, पानीपत।
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