पानीपत। वित्तीय वर्ष का अंतिम सप्ताह चल रहा है। अस्पताल में ऑडिट चल रहा है। इस कारण कई काम लंबित हो गए हैं। रेबीज इंजेक्शन गड़बड़झाले की जांच भी अटक गई है। छह दिन बाद भी मामले में जांच शुरू नहीं हुई है। जांच कमेटी आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों का ऑनलाइन डेटा अपलोड करने में व्यस्त है। ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी जांच निष्पक्ष हो ऐसी संभावनाएं कम ही हैं।
22 मार्च को सिविल अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन लगाने में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया था। रेबीज विंग में काम करने वाले कर्मचारी लोगों से पैसे लेकर बिना पर्ची के रेबीज के इंजेक्शन लगाते मिले थे। एक ही दिन में ऐसा 15 लोगों के साथ किया गया था। अब पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर ने मामले की जांच डिप्टी एमएस को सौंपी थी।
क्या कहा था शिकायतकर्ता ने
भारत नगर से इंजेक्शन लगवाने पहुंचे भारत नगर निवासी मनोहर व गांव गढ़ी बेसिक निवासी अमरीश ने 22 मार्च को पीएमओ को शिकायत देते हुए कहा था कि उन्होंने अस्पताल से रेबीज के चार इंजेक्शन लगवाए हैं। उनसे हर इंजेक्शन के 100 रुपये लिए गए हैं उन्हें इस संबंध में कोई पर्ची नहीं दी गई। कर्मचारियों ने ये पैसे अपनी जेब में डाल लिए हैं। ये कर्मचारी सभी रोगियों के साथ ऐसा ही कर रहे हैं।
हर रोज लगभग 25-30 लोग पहुंचते हैं इंजेक्शन लगवाने
सिविल अस्पताल व समालखा अस्पताल को छोड़कर किसी भी स्वास्थ्य केंद्र में फिलहाल रेबीज के इंजेक्शन नहीं हैं। निजी अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन की फीस 300 रुपये है। इसलिए दूर-दूर से लोग इंजेक्शन लगवाने सिविल अस्पताल में पहुंचते हैं। सिविल अस्पताल में हर रोज 25-30 लोगों को इंजेक्शन लगते हैं। लोगों का आरोप है कि 1200-1500 रुपये कर्मचारी अपनी जेब में डालते हैं। रिकॉर्ड में कम इंजेक्शन चढ़ाते हैं।
कई कामों में व्यस्त थे, इसलिए जांच नहीं हुई : डिप्टी एमएस
वह आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों का ऑनलाइन डाटा अपलोड करने में व्यस्त हैं। अस्पताल का ऑडिट भी चल रहा है। इसलिए मामले की जांच अभी शुरू नहीं हुई है।
- डॉ. संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल