पानीपत। स्वास्थ्य विभाग की चुस्ती कहें या लापरवाही कि विभाग ने अपनी वेबसाइट को अपडेट दिखाने के चक्कर में उन बच्चों को मृत दिखा दिया, जिन बच्चों को अभी जन्म तक नहीं हुआ। विभाग का कारनामा यहीं समाप्त नहीं हुआ, विभाग ने वेबसाइट में इन बच्चों के मृत होने के कारण तक बताए हैं।
ऐसा भी नहीं है कि वेबसाइट पर डालने से पहले इन आंकड़ों को चेक नहीं किया जाता। बच्चे के जन्म के समय इसकी रिपोर्ट एएनएम से लेकर सीएमओ और डीएमओ तक जाती है। इनकी जांच के बाद ही वेबसाइट पर अपलोड के लिए भेजी जाती है।
इन मामलों में लोगों का कहना है कि लगता है स्वास्थ्य विभाग का काम इलाज के साथ-साथ भविष्यवाणी करना भी हो गया है। यही कारण है वह साइट पर अगले दो से तीन में पैदा होने वाले बच्चों के जन्म के साथ मृत्यु के कारणों को भी स्पष्ट कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग जन्म-मृत्यु का डाटा ऑनलाइन करता है। इसके लिए स्टेट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पंचकूला में पूरे प्रदेश का जन्म-मृत्यु का डाटा एकत्रित होता है। इससे कोई भी व्यक्ति जरूरत पड़ने पर आसानी से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बना सकता है।
इन मामलों में खाया गच्चा
मामला नंबर एक
पहला मामला पीएचसी अहर के अंतर्गत सब सेंटर, भाऊपुर का है। यहां पर रानी पत्नी अनिल कुमार निवासी कारद को एक दिसंबर 2013 को एक लड़की का जन्म दिखाया। इसमें लड़की की जन्म के कुछ देर बाद ही मौत हो गई। डॉक्टरों ने मौत का कारण सांस लेने में तकलीफ होना बताया है।
मामला नंबर दो
दूसरा मामला समालखा सीएचसी के अंतर्गत पावटी सब सेंटर का है। यहां पर डिकाडला निवासी पूजा पत्नी अर्जुन को एक नवंबर 2013 को एक बच्चे का जन्म दिखाया और उसके तुरंत बाद नवजात की मौत हो गई। मौत का कारण अज्ञात दिखाया है।
मामला नंबर तीन
तीसरा मामला अलूपुर गांव का है। विभाग के रिकार्ड में कविता पत्नी राजेश को पांच नवंबर 2013 को लड़की का जन्म और इसके कुछ देर बाद उसकी मौत दिखाई है। बच्ची की मौत का कारण कम वजन होना है।
ऐसे होता है नाम दर्ज
एएनएम बच्चे के जन्म की सूचना जन्म और मृत्यु का रिकार्ड दर्ज करती है। हर माह की रिपोर्ट एनएचवी को दी जाती है और एनएचवी इस रिपोर्ट को पीएचसी और सीएचसी को देती है। इसके बाद रिपोर्ट खंड के एसएमओ को जाती है। एसएमओ के पास से यह रिकार्ड सीएमओ और सीएमओ और डीएमयू की जांच के बाद सीआरएस को रिपोर्ट जाती है।
गलती सुधारना मुश्किल
स्वास्थ्य अधिकारी सीआरएस डाटा को दोबारा अपडेट करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जानकारों की सोच इसके उलट है। उनका कहना है कि सीआरएस डाटा एक बार एंट्री हो जाने के बाद दोबारा अपडेट नहीं हो सकता।