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Panipat News: बारामूला में हॉस्टल के बाहर हो रहे थे धमाके, लगता था अब नहीं बचेंगे

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माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। भारत की एयर स्ट्राइक के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने सात मई को ड्रोन और मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं। ब्लैक आउट के बीच लगातार धमाके हो रहे थे। आसमान में ड्रोन मंडरा रहे थे। धमाकों की आवाज सुनकर दिल बैठ जाता था। कई बार ऐसा लगा कि अब बच पाना मुश्किल होगा।
भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई हौसला दे रही थी। यह कहानी है हरियाणा के उन छात्रों की जो शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बारामूला स्थित नार्थ कैंपस में पढ़ाई करते हैं। हरियाणा सरकार इन छात्रों को वहां से निकालकर लाई और सबको घर पहुंचाया। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बारामूला स्थित नार्थ कैंपस में पीएचडी कर रहे दलबीर नगर कुटानी रोड के मुकेश राठाैर ने बताया कि कैंपस में हरियाणा के 16 विद्यार्थी हैं। सभी छात्र रविवार को अपने-अपने घर पहुंचे। इनमें नारनौल के दीपक यादव, कुरुक्षेत्र के युवराज समेत हिसार, जींद, अंबाला व पंचकूला के रहने वाले हैं। मुकेश ने बताया कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की तरफ से हमले शुरू हो गए थे। शाम होते ड्रोन और मिसाइल से हमले शुरू हो जाते थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हरियाणा के विद्यार्थियों को बार-बार कहने के बाद भी नहीं भेजा। वे हॉस्टल की खिड़की से ड्रोन हमले देख रहे थे। उन्होंने पिता को फोन कर पूरी जानकारी दी। उनके पिता ने मेयर कोमल सैनी को संपर्क किया। मेयर ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और पानीपत शहर के विधायक प्रमोद विज से बात की। इसके बाद उनके पास केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और मेयर कोमल सैनी का फोन आया। उनके पास विश्वविद्यालय में 10 मई को सुबह 10 बजे बस पहुंची। वे उस बस में बारामूला से रवाना हुए। रात को एक बजे जम्मू पहुंचे। यहां से हरियाणा रोडवेज की बस में दो बजे सवार हुए और वे रविवार दोपहर एक बजे अपने घर पहुंचे।
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इस दौरान खाना भी अच्छा नहीं लगा। वहां से निकलने के बाद पूरे रास्ते 24 घंटे कुछ भी भरपेट नहीं खाया। सरकार ने उनसे कोई किराया नहीं लिया। उन्होंने बताया कि माता-पिता और तीनों बहन उसको लेकर बहुत चिंंतित थे। यहां पहुंचने के बाद राहत भरी सांस ली है।
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