पानीपत। बिजली के नए टैरिफ के बाद धागा से लेकर टेक्सटाइल उद्यमियों को बड़ा झटका लगा है। उद्योगों में बिजली बिलों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में उत्पादों का लागत मूल्य भी बढ़ना तय है। उद्यमी इसे नहीं बढ़ाते हैं तो उनको खुद घाटा उठाना पड़ेगा।
वे उत्पाद का रेट बढ़ाते हैं तो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटने का डर है। हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अलावा यार्न उद्यमी भी स्थानीय नेताओं से लेकर सरकार के मंत्री तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पानीपत में करीब 25 हजार छोटे बड़े उद्योग हैं।
यहां घरेलू के साथ निर्यात भी होता है। घरेलू बाजार पर ध्यान दें तो करीब 80 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक बाजार है। वहीं करीब 18 हजार करोड़ का निर्यात है। देश में पानीपत के धागे के मुकाबले में पंजाब के समाना के उद्यमी हैं।
पंजाब में बिजली सस्ती होने पर समाना के धागे का रेट पानीपत से दो रुपये प्रति किलोग्राम कम है। पानीपत के धागा उद्यमी पहले से ही उनके साथ मुकाबला करने के लिए खुद का घाटा उठा रहे थे। वहीं टेक्सटाइल उद्यमियों के सामने अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन बड़ा प्रतिद्वंद्वी है। अब बिजली के रेट बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पानीपत के उत्पाद और महंगे हो जाएंगे।
फिक्स बिल में दो हजार रुपये तक का इजाफा : सीए शाखा पानीपत के पूर्व चेयरमैन जगदीश धमीजा ने बताया कि बिजली के बिल में सामान्य 10 से 40 पैसे का इजाफा किया है। ज्यादा फर्क फिक्स्ड चार्जेज में रेट बढ़ाने पर है। 20 किलोवाट तक के एलटी कनेक्शन पर अब 100 रुपये प्रति केपीए लगा दिया है। अब बिल में हर महीने दो हजार रुपये तक की बढ़ोतरी है।
20 से अधिक और 50 किलोवाट के एलटी कनेक्शन पर 160 से बढ़ाकर 250 रुपये कर दिया है। 50 से ऊपर की सप्लाई एचटी में 165 से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति केवीए कर दिया है। इसका असर सभी उद्योगों में रेट बढ़ाने की वजह से करीबन पांच प्रतिशत और फिक्स्ड चार्जेज की वजह से अलग से बढ़ेगा।
अब तक बंद उद्योगों के मालिकों को सबसे अधिक दिक्कत हो सकती है। उनको बिना प्रयोग किए अब 290 रुपये प्रति केवीए देने होंगे। यह पहले 165 रुपये प्रति केवीए का था। उन्होंने बताया कि उद्यमियों के लिए अस्थायी कनेक्शन का प्रावधान देना चाहिए।