बिजली निगम के पानीपत सर्कल कार्यालय स्थित सब स्टेशन में कंट्रोल रूम से फीडरों तक सप्लाई पहुंचाने के लिए बिछा जाल हादसाें को न्योता दे रहा है।
ये केबल हैवी वोल्टेज हैं। गर्मियों के दिनों में तापमान और लोड अधिक बढ़ने के साथ ही केबल स्टीव (केबलाें पर चढ़ाई गई परत) गर्म होकर नर्म हो जाती है।
इसके कारण इनके पंक्चर होने की आशंका बनी रहती है। निगम अधिकारी केबलों में विशेष सुधार करने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं।
खुले में ही पड़ी हैं सभी केबल
फीडरों तक बिजली सप्लाई पहुंचाने के लिए बिछाया गया केबलों का जाल खुले में ही पड़ा है। इससे भी बड़ी लापरवाही केबलों को एक-दूसरे के ऊपर डालकर बरती गई है। नियम के अनुसार केबल जमीन के अंदर दबाकर अच्छी प्रकार से मिट्टी डालकर कंट्रोल रूम से खंबे तक पहुंचाया जाना चाहिए था, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। केबल जमीन की सतह पर ही एक-दूसरे के ऊपर से खंबे तक पहुंची हैं।
23 फीडरों में पहुंचती है सप्लाई
पानीपत सब डिवीजन के कंट्रोल रूम से 23 फीडरों तक सप्लाई पहुंची हैं। सभी फीडर 11 केवी तक क्षमता वाले हैं। केबलों के जाल बिछाते समय कोई विशेष सावधानियां नहीं बरती गई थीं। इस कारण अब परेशानी खड़ी शुरू हो गई है।
फाल्ट होने शुरू
गर्मियों का मौसम शुरू होते केबल में पंक्चर होना शुरू हो गया है। विभागीय सूत्राें की मानें तो अभी तक केबलों में दो बार पंक्चर हो चुका है। गनीमत यह रही कि दोनों ही बार पंक्चर वाले स्थान पर तुंरत नजर पड़ गई। देरी होने पर कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एक केबल में लगी आग हो सकती है गंभीर
किसी भी एक केबल में लगी आग अन्य केबलों को भी जला सकती है, क्योंकि सभी केबल एक-दूसरे से लिपटी पड़ी हैं। हैवी वोल्टेज होने के कारण केबलाें की परत जल्दी गरम हो जाती है। गर्म केबल आग को भी जल्दी पकड़ लेगी। ऐसी स्थिति में आधे से ज्यादा शहर अंधेरे में डूब जाएगा।