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Panipat News: पुष्य नक्षत्र में एकादशी का व्रत आज, कार्यों में मिलेगी सिद्धि

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पानीपत। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी और रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस बार 10 मार्च सोमवार को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की भक्ति व पूजा की जाती है। पूजा करते समय कलश में आंवले की टहनी रखनी चाहिए। मान्यता है कि आमलकी एकादशी का व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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प्राचीन सिद्ध देवी मंदिर के आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि एकादशी का व्रत रविवार को सुबह 7:46 से शुरू होकर सोमवार को सुबह 7:45 तक रहेगा लेकिन सूर्योदय की उदयातिथि 10 मार्च सोमवार को होने से आमलकी एकादशी का व्रत सोमवार को रखा जाएगा। इस बार सूर्योदय एकादशी का व्रत पुष्य नक्षत्र में रखा जाएगा। पुष्य नक्षत्र में व्रत करने से सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। भगवान विष्णु की पूजा आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर करनी चाहिए और ओम नमो नारायणाय मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति स्थापित होती है। पुष्य नक्षत्र सभी कार्यों की सिद्धि के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन दान, पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। इससे भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है।
छह भाव मन में रख करनी चाहिए पूजा-
एकादशी व्रत पर भगवान विष्णु की पूजा करते समय व्रतधारी को मुख्य रूप से इन छह भावों को मन में रखा पूजा करनी चाहिए। पूजा करते समय श्रद्धा, विश्वास, विनम्रता, प्रेम, प्रणाम का भाव रखना चाहिए और भगवान विष्णु का जय-जयकार करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते है और मनुष्य की सभी मनोकामना पूरी करते हैं। आमलकी एकादशी व्रतधारी को पूरा दिन क्रोध और कंजूस भाव से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ये भाव मन में भी नहीं रखने चाहिए। पूरी श्रद्धाभक्ति से भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करना चाहिए।
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