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होटल-ढाबों में कचरा प्रबंधन नहीं करने पर होगी दो साल तक की जेल, लगेगा जुर्माना

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नियमों नियमों के विरुद्ध चल रहे ढाबों, होटल, मोटल, बैंक्वेट हॉल और मैरिज हॉल पर सरकार ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। पर्यावरण की दृष्टि से यह जरूरी है और इसके लिए सरकार ने नई पॉलिसी का ड्रॉफ्ट जारी कर दिया है। इस नए ड्रॉफ्ट के तहत तय किए गए नियमों को नहीं मानने पर दो सात तक की जेल के साथ ही जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही इन्हें हर माह कचरा प्रबंधन और भूजल के इस्तेमाल की रिपोर्ट भी देनी होगी। इसके साथ ही अपनी इकाई से निकलने वाले गंदे पानी का भी ट्रीटमेंट करना होगा। यानी एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) या कॉमन एफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाना होगा। जिससे गंदा पानी रिसाइकिल होकर आगे जाए। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि क्योंकि सड़क और हाईवे किनारे ढाबों और होटलों की संख्या बढ़ती जा रही है और इनकी ओर से कचरा प्रबंधन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि स्थानीय शहरी निकाय के पास यह डेटा भी नहीं है कि ये ग्राउंड वाटर का किस हद तक इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां सबसे ज्यादा प्लास्टिक का इस्तेमाल भी यहीं हो रहा है। ऐसे में, सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नई पॉलिसी का ड्रॉफ्ट तैयार कर इसका पालन कराने की जिम्मेदारी नगर निगमों की सौंपी है।
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पानीपत में 2700 ढाबे, 90 होटल, 400 गेस्ट हाउस और 200 बैंक्वेट हॉल, 90 फीसदी नियमों के विरुद्ध
जिले में हाइवे, नेशनल हाइवे, सड़कों, कंपनियों, फैक्टरियों और औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 2700 ढाबे, 90 होटल, 400 गेस्ट हाउस, 200 बैक्वेट और मैरिज हॉल चल रहे हैं। 90 प्रतिशत ढाबों का पानी खुले में छोड़ा जाता है। इनके पास न तो नगर निगम के सीवरेज कनेक्शन हैं और न ही नगर निगम की पानी की सप्लाई है। अवैध रूप से ढाबे पानी को छोड़ते हैं और भू जल का दोहन करते हैं।
रोज 20 लाख लीटर भूजल का अवैध रूप से हो रहा दोहन
ढाबे और होटल हर रोज अनुमानित 20 लाख लीटर पानी का अवैध रूप से दोहन कर रहे हैं। ढाबों से निकलने वाली प्लास्टिक की बोतल, प्लेट, पैकेट और वेस्ट खाने को नालों में फेंक दिया जाता है। इससे ड्रेन और यमुना प्रदूषित हो रही है। अधिकतर ढाबों के पास बिजली के कनेक्शन भी नहीं है। इसलिए इन पर हमेशा बिजली चोरी के आरोप भी लगते रहे है। अब सरकार ने नए ड्राफ्ट पॉलिसी में ये निर्देश दिए है कि होटल, मोटल, ढाबों और बैंक्वेट हॉल को अपना कॉमन एफुऐंट ट्रीटमेंट प्लॉट लगाना होगा। इस प्लॉट में पानी साफ होगा और नालों में जाएगा। सरकार ने ये ऑप्शन इन पर छोड़ा है कि ये एक समूह में प्लांट लगाते हैं या अपना अलग से लगाते हैं। अगर इनके स्थान तक नगर निगम की सीवरेज और पानी की सेवाएं पहुंच रही हैं तो इन्हें ये सेवाएं लेनी होंगी। अपनी मर्जी से सबमर्सिबल नहीं लगा सकेंगे। नगर निगम की सीवरेज की सेवाएं होने के बाद अपनी अलग से सीवरेज लाइन नहीं डाल सकेंगे। हर माह इस संबंधित रिपोर्ट नगर निगम में पेश की जाएगी।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व नगर निगम मिलकर करेगा काम
होटल, मोटल और ढाबों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर काम करेगा। नगर निगम हर माह इनकी रिपोर्ट चेक करेगा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड होटल और मैरिज हॉल में चलने वाले जनरेटर पर नजर रखेग। कितने भू जल का प्रयोग किया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट भू जल प्राधिकरण को देनी होगी।
होटल, बड़े ढाबों को लेनी होगी भू जल के लिए परमिशन
केंद्रीय भू जल प्राधिकरण ने सख्त निर्देश दिए हैं कि फैक्टरियों, होटल व बड़े ढाबों को भू जल निकालने के लिए एनओसी लेनी होगी। इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी ताकि भू जल को बचाया जा सके। जो अवैध रूप से भू जल का दोहन करते पाया गया उस पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
किसी होटल व ढाबे के पास नहीं भू जल का दोहन करने की परमिशन
पानीपत का भू जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। पिछले 10 साल में 11 फुट तक पानी का जल स्तर गिरा है। बापौली और समालखा क्षेत्र को डार्क जोन में रखा गया है। पानीपत में 21 फैक्टरियों के पास ही भू-जल निकालने की एनओसी है। शहर में चल रहे 200 होटल, 400 गेस्ट हाउस और ढाबों के पास भू जल प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त नहीं है। अवैध रूप से हर रोज ये लगभग 20 लाख लीटर पानी का दोहन कर रहे हैं।
स्थानीय शहरी निकाय मंत्रालय की ओर से निर्देश मिले हैं। नई पॉलिसी को लागू करने की दिशा में कम उठाए जा रहे हैं। कचरा प्रबंधन की दिशा में नगर निगम की ओर से काम किया जा रहा है। - औमप्रकाश, नगर आयुक्त, नगर निगम
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