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डॉक्टरों को रास नहीं आ रहा सिविल अस्पताल में इलाज

Sat, 21 May 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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 सिविल अस्पताल में डॉक्टरों को इलाज करना रास नहीं आ रहा है। अस्पताल में तैनात चार डॉक्टरों के इस्तीफा देने के बाद दो और डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी है। सिविल अस्पताल में कार्यरत डॉ. अंकित ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है, जबकि डॉ. अरविंद ने एक जून को नौकरी छोड़ने का स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दी है। गत 20 दिनों में छह डॉक्टरों ने नौकरी को बाय-बाय बोल दिया है।
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नौकरी छोड़ने वाले डॉक्टरों ने स्वास्थ्य सेवाओं को नौकरी छोड़ने का कारण बताया। इन डॉक्टरों के जाने के बाद सरकारी अस्पताल में इलाज चिंताजनक हो गया है। अब सिविल अस्पताल में मात्र 36 डॉक्टर ही बचे हैं। आपातकाल विभाग की ड्यूटी के लिए मात्र तीन डॉक्टर ही उपलब्ध हैैं।


सिविल अस्पताल की लचर व्यवस्था सुधारने का नाम नहीं ले रही। पांच माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने शहर के सिविल अस्पताल में आठ नए डॉक्टरों को भेजा था। इनमें से गत 20 दिनों में छह डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। अगले माह तक दो और डॉक्टरों के भी नौकरी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। डॉक्टरों के सिविल अस्पताल के प्रति रूखे रैवये से अस्पताल प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा सकती हैं। गत 20 दिनों में सिविल अस्पताल से छह डॉक्टरों ने अस्पताल के एमएस को पत्र लिख नौकरी छोड़ दी है। सभी डॉक्टर पीजी करने के लिए लीव विदाउट पे चले गए हैं।
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मरीज हो रहे परेशान
अब सिविल अस्पताल में मात्र 36 डॉक्टर बचे है। इनमें से हर रोज औसतन तीन-चार डॉक्टर छुट्टी पर रहते है। दो डॉक्टर कोर्ट में गवाही पर रहते है। ऐसे में मजबूर सिविल अस्पताल प्रशासन को एक डॉक्टर को दो-दो विभागों की डयूटी सौंपनी पड़ रही है। इसका सीधा असर शहर के लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण लोग धक्के खाकर बिना इलाज के ही घर वापिस लौट रहे है। लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ रहा है।

गत 20 दिनों में इन डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी
एक मई: डॉ.वैशाली मलिक, डॉ. आयूषी व डॉ. विकास कुमार ने एमएस को लीव विदाउट पे का पत्र सौंपा। 15 मई को डॉ. गौरव कुमार ने एमएस को पत्र देकर नौकरी छोड़ पीजी की शिक्षा लेने को चले गए।
18 मई को डॉ. अंकित ने भी नौकरी को बाय-बाय कह दिया। डॉ.अरविंद ने एक जून को नौकरी से विदाउट पे जाने का एमएस को पत्र दे दिया है। एक जून को डॉ. अरविंद नौकरी छोड़ पढ़ाई करने के लिए चले जाएंगे।

अब तक 16 डॉक्टर छोड़ चुके है नौकरी
सिविल अस्पताल से अब तक 16 डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके है। इनमें से छह डॉक्टर पीजी करने के लिए चले गए। कई डॉक्टरों ने अपने अस्पताल खोल लिये,जबकि कई डॉक्टर निजी अस्पतालों में नौकरी कर रहे है। सभी डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की नीतियों से नाराज बताए जा रहे है। डॉक्टरों के मुताबिक उनको उनकी मेहनत के अनुसार वेतन नहीं मिलता।

15 दिन से सीएमओ व डिप्टी सीएमओ छुट्टी पर
सिविल अस्पताल के हालात यह है कि मरीजों का इलाज करने के लिए डॉक्टर नहीं है। मरीजों की शिकायते सुनने वाले आलाधिकारी 15 दिनों से छुट्टी पर हैं। जिले के सिविल सर्जन डॉ. इंद्रजीत धनखड़ व डिप्टी सिविल सर्जन डॉ.शशि गर्ग 15 दिनों से छुट्टी पर है। अस्पताल का कार्यभार फिलहाल डॉ.नवीन सुनेजा के पास है। जिनके पर अतिरिक्त काम का दबाव है।

अस्पताल के रिकार्ड में डॉक्टर पूरे
सिविल अस्पताल के रिकार्ड में डॉक्टरों की संख्या 47 है। जबकि हकीकत में सिविल अस्पताल में मात्र 38 डॉक्टर ही है। जिन छह डॉक्टरों ने फिलहाल नौकरी छोड़ी है, वे लीव विदाउट पे चले गए है। सभी डॉक्टरों की हाजिरी रजिस्ट्रर में गैरहाजिरी लगेगी, लेकिन अस्पताल के रिकार्ड में इनका नाम रहेगा। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में पानीपत के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या पूरी है और अस्पताल के डॉक्टरों की कमी नहीं है,जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।


डॉक्टर लीव विदाउट पे जा रहे है। जिनको जाना है उनको कौन रोक सकता है। वह मरीजों के इलाज में कोई कोताही नहीं बरतेंगे। दूसरे डॉक्टरों के साथ एडजेस्टमेंट कर रहे हैं। सभी डॉक्टरों की रजिस्ट्रर में गैरहाजिरी लग रही है।
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डॉ. एसके गुप्ता, एमएस सिविल अस्पताल पानीपत।
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