पानीपत। नगर निगम का दायरा बढ़ा और लोगों की दिक्कतें देखते हुए कई योजनाएं भी बनीं पर इनमें से कई मूर्तरूप नहीं ले सकीं। जैसे- शहर से डेयरियों को बाहर निकालने के लिए 18 साल पहले गांव बिंझौल में 15 एकड़ जमीन लेकर प्लाट बांटे गए पर आज तक यहां निगम सुविधाएं नहीं मुहैया करवा पाया। नतीजा डेयरियां शहर से बाहर नहीं जा सकीं। इनसे निकलने वाला वेस्ट नालियों, नालों व सीवरेज की ब्लॉकेज का मुख्य कारण भी माना जाता है।
निगम की लाख कोशिशों के बावजूद आज भी शहर में तीन सौ से भी ज्यादा छोटी-बड़ी डेयरियां मौजूद हैं। निगम ने अपनी गोबर प्रबंधन नीति के तहत डेयरी संचालकों को पंजीकरण कराने के लिए कहा। कुछ डेयरी संचालकों को नोटिस भी भेजे थे लेकिन नतीजा सिफर रहा। निगम अधिकारियों के मुताबिक, आज भी शहर में करीब 300 डेयरियां हैं, इनमें से करीब 90 प्रतिशत डेयरियां शहर के भीतर है, कुछ डेयरियां ही आउॅटर में हैं। कई डेयरी संचालक प्लाट की डिमांड करते हैं, लेकिन निगम के पास डेयरियों के लिए जमीन नहीं है। जिनको प्लाट अलॉट किए हैं वे सुविधाओं के अभाव में वहां जाना नहीं चाहते।
ये थी योजना-
हालिया नगर निगम, तत्काल नगर परिषद ने 2003 में डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। इस दौरान करवाए गए सर्वे में करीब 197 डेयरियां मिलीं। इनको शिफ्ट करने के लिए गांव बिंझौल में करीब डेढ़ करोड़ रुपये से 15 एकड़ 17 मरले जमीन भी खरीदी गई थी। इस जमीन पर 147 प्लाट काटे गए थे। इनमें से 92 प्लाट को नो प्रोफिट नो लॉस स्कीम के तहत 600 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से अलॉट कर दिया गया।
ये सुविधाएं देनी थी जो नहीं दी
नगर निगम को यहां पशुओं के लिए एक जोहड़ यानी तालाब बनाना था। साथ ही पशु चिकित्सालय व पुलिस चौकी का भी निर्माण कराना था पर इनमें से कुछ आज तक नहीं बन सका है। इसके अलावा यहां पीने के पानी की पाइप लाइन बिछाई जानी थी, ये भी अधूरी रही। यहां करीब सौ स्ट्रीट लाइटों की आवश्कयता थी, जिसमें से मौके पर करीब चार या पांच लाइट ही लगी हैं। इन सुविधाओं के न होने से ये डेयरियां शिफ्ट नहीं हो पाई हैं।
गोबर प्रबंधन नीति हुई फेल-
नगर निगम ने डेयरियों से निकलने वाले वेस्ट के लिए एक गोबर प्रबंधन नीति तक बनाई थी। इसके अंतर्गत शहर के सभी डेयरियों का पंजीकरण निगम में होना अनिवार्य था। इसके बाद रजिस्टर्ड डेयरियों से निकलने वाले वेस्ट से निगम को खाद बनाने का काम करना था। इसके लिए निगम को ही डेयरियों से वेस्ट उठवाना था। इसके लिए डेयरी संचालकों से चार्ज लिया जाना था लेकिन निगम का ये अभियान भी सिरे नहीं चढ़ सका।
डेयरी मुख्य समस्या, करवाएंगे समाधान
डेयरियों से निकलने वाला वेस्ट शहर की निकासी व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा पैदा करता है। इनके लिए प्लाट भी आवंटित किए गए थे लेकिन डेयरियां अभी तक शिफ्ट नहीं हो पाई। इसके लिए निगम अधिकारियों से पूरे प्रोजेक्ट का ब्योरा लिया जाएगा और इनकी शिफ्टिंग की प्लानिंग की जाएगी। -दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, पानीपत।