पानीपत। लोक आस्था और सूर्य उपासना का चार दिवसीय छठ महापर्व मनाया जा रहा है। पूर्वांचल वासियों के प्रमुख त्योहार छठ महापर्व पर बुधवार को श्रद्धालुओं और व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मइया को नमन किया। व्रतियों और श्रद्धालुओं ने छठ मइया से परिवार की सुख समृद्धि की मन्नत मांगी। छठ महापर्व को लेकर दिल्ली पैरलल नहर पर बने घाटों पर श्रद्धालु उमड़ पड़े।
शाम पांच बजकर 29 मिनट पर सूर्य अस्त हुआ। छठ महापर्व को लेकर जिले में यमुना नदी और दिल्ली पैरलल नहर पर बनाए गए घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। घाटों के अलावा लोगों ने कई अन्य स्थानों पर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। छठ पर्व को लेकर लोगों में भी उत्साह देखा गया। व्रती और श्रद्धालु दोपहर बाद करीब तीन बजे से ही घाटों पर पहुंचने शुरू हो गए। घाटों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए उमड़े। इन श्रद्धालुओं के जमावड़े से घाटों का दृश्य काफी मनोहारी लग रहा था। हालांकि कोरोना संक्रमण से बचने तथा प्रशासन के आह्वान पर हजारों व्रतियों ने अपने घरों की छतों पर ही सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया।
बाजार में रही भीड़
छठ पूजा के दिन शहर में रौनक रही, दिन भर बाजार में भी भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने सुबह घरों में साफ-सफाई की। बाद में आटे व चीनी का प्रसाद और ठेकुआ तैयार किया गया। शाम की पूजा के लिए मिठाई, फल व गन्ने की खरीदारी की गई। जिन लोगों ने पहले फल-फूल की खरीदारी नहीं की थी, उन्होंने बाजार में खरीदारी की और छठ पर्व में प्रयोग होने वाली सामग्री खरीदी। कपड़ों की दुकान पर भी खासी भीड़ रही।
छठ पूजा के गीतों से गुंजायमान रहे घाट
छठ पूजा के दौरान महिलाओं ने छठ मइया के गीत गाकर पूरा माहौल भक्तिमय बना दिया। व्रती महिलाओं ने पारंपरिक छठ गीतों निर्धन जानेला ई धनवान जानेला, महिमा छठ मइया के अपार ई जहां जानेला... सेविले चरन तोहार, कांच के बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए.., हम करेली छठ बरतिया से उनखे लागी... जैसे गीतों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने निर्जला उपवास रखते हुए शाम को अस्ताचलगामी सूर्य देव को जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया।
आज उदीयमान सूर्य को देंगे अर्ध्य
बुधवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु अब बृहस्पतिवार की सुुबह उदीयमान सूर्य भगवान को जल में खड़े होकर अर्ध्य देंगे और छठ मइया से अपने परिवार के लिए मंगल कामना करेंगे। वीरवार को सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर सूर्य उदय होगा। इसके साथ ही पर्व संपन्न होगा। इसके बाद व्रतियां पारण कर ठेकुआ का प्रसाद बांटेंगी।
दोपहर बाद ही घाटों की ओर बढ़ने लगे कदम
बीते मंगलवार को खरना के बाद से व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू कर दिया था। रातभर व्रतियों ने छठी मइया की आराधना की। घर-घर छठी मइया के गीत गाए जा रहे थे। ऐसे में सुबह कब हो गई, व्रतियों को पता तक नहीं चला। बुधवार को दिन चढ़ने के साथ ही व्रतियों में अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य प्रदान करने के लिए उत्साह चरम पर पहुंच चुका था। दोपहर बाद 3 बजे से ही दूर-दराज के व्रतियों के कदम यमुना नदी और दिल्ली पैरलल नहर घाटों और तालाबों की ओर बढ़ने शुरू हो गए। शाम होते ही घाट व्रतियों से पट गए। घरों की छतों का माहौल उत्सव जैसा हो गया।
पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था, रूट किए डायवर्ट
छठ महापर्व को लेकर पुलिस प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए। वहीं, जाम की स्थिति से निपटने के लिए तीनों प्रमुख मार्गों के रूट दोपहर बाद भारी वाहनों के लिए डायवर्ट कर दिए गए। असंध रोड पर गांव नारा के पास से रूट डायवर्ट कर कवी, धर्मगढ़, मूनक से होते हुए कोहंड जीटी रोड के रास्ते पानीपत पहुंचे। वहीं, गोहाना रोड के भारी वाहनों को गांव डाहर से गांव सिवाह बाईपास के रास्ते पानीपत भेजा गया।
पानीपत। असंध रोड पर थर्मल माइनर पर सूर्य को अर्घ्य देते हुए व लगी हुई लोगों की भारी भीड़।- फोटो : Panipat
पानीपत। असंध रोड पर थर्मल माइनर पर सूर्य को अर्घ्य देते हुए श्रद्धालु।- फोटो : Panipat
पानीपत। असंध रोड पर थर्मल माइनर पर छठ मइया पर पूजा करते हुए श्रद्धालु।- फोटो : Panipat
पानीपत। कुटारी रोड के घाट पर पूजा करती हुई श्रद्धालु।- फोटो : Panipat