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जिले में बढ़े डेंगू के मरीज, निजी ब्लड बैंक से खरीद रहे प्लेटलेट्स

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जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 82 मरीजों को डेंगू की पुष्टि की गई है, लेकिन इन मरीजों की प्लेटलेट्स लगातार कम होती जा रही है। इन मरीजों को अस्पताल में सुविधा नहीं होने के कारण प्लेटलेटस निजी ब्लड बैंकों से खरीदने पड़ रहे हैं। वहीं संबंधित ब्लड ग्रुप की प्लेटलेट्स उपलब्ध न होने के कारण सामाजिक संस्थाएं पूरा सहयोग कर रही है। सर्व समाज कल्याण सेवा समिति के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर सैनी का कहना है कि वह इस सीजन में 15-16 मरीजों को प्लेटलेट्स उपलब्ध करा चुका है। वहीं समाजसेवी डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि वे दो बार खुद प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं और अभी तक 6-7 मरीजों की मदद की जा चुकी है।
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जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड बैग न होने से धूल फांक रही है। डेंगू का डंक ने अब मरीजों व तीमारदारों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ा दी है। 300 एमएल यानी 50 से 60 हजार प्लेटलेट्स खरीदने के लिए मरीजों को निजी ब्लड बैंक में 11 हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। पंचकूला और गुरुग्राम के बाद कुरुक्षेत्र के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का लाइसेंस मिलने से जरूरतमंदों को सरकारी दरों पर प्लेटलेट्स मिलने की आस जगी थी, लेकिन ब्लड बैग न मिलने से इस मशीन को अब तक शुरू नहीं किया गया है। इसलिए हर रोज 5 से 7 मरीजों के परिजन प्लेटलेट्स के लिए निजी ब्लड बैंकों की ओर रुख कर रहे हैं। बता दें कि सरकार की ओर से वर्ष 2018 में जिला स्वास्थ्य विभाग को ब्लड कंपोनेंट मशीन मुहैया कराई गई थी, ताकि मरीजों को रक्त, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा उपलब्ध हो सके पर आधे-अधूरे उपकरण के चलते मशीन धूल फांक रही थी। उपकरण पूरे होने पर जिला स्वास्थ्य विभाग को 25 दिन पहले मशीन का लाइसेंस दिया गया था। जिला स्वास्थ्य विभाग के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रमा का कहना है कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के ब्लड बैग की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि आगामी एक-दो दिन तक ब्लड बैग उपलब्ध हो जाएंगे। इसके पश्चात हर जरूरतमंद मरीजों को रैंडम डोनर प्लेटलेट्स निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
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खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग करती है ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग अलग कर देती है। थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा को अलग-अलग करती है। इन तत्वों को ब्लड सेपरेटर मशीन से अलग करने के बाद पूरी यूनिट खून चढ़ाने के बजाय इन तत्वों को चढ़ाया जाता है। ऐसे में इन मरीजों को सीधा लाभ पहुंचता है।
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पीजीआई चंडीगढ़ में दिया जाएगा विशेषज्ञों और लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब 25 से 28 अक्तूबर तक जिला अस्पताल में पैथालॉजिस्ट और लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीजीआई चंडीगढ़ में लगातार तीन दिन तक दिए जाने वाले इस प्रशिक्षण में मशीन के संचालन के बारे में बारीकियां समझाई जाएंगी।
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