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जंगल में बंदर छोड़ने की परमिशन भी मिल गई, लेकिन ठेकेदार को बताया तक नहीं

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नगर निगम अधिकारी भी कई बार लापरवाही की हद पार कर देते हैं। पिछले एक माह से बंदर पकड़े की प्रक्रिया आज तक शुरू नहीं हो पाई है। कभी टेेंडरों में परेशानी तो कभी वर्क आर्डर न मिल पाना अधिकारियों की लापरवाही को साफ दर्शाता रहा है। इसके बाद बंदर पकड़ने की अनुमति लेने मेयर पंचकूला विभाग अधिकारियों से भी मिल आईं। अनुमति भी जारी हो गई, लेकिन हद तो ये है कि इस बात का ठेकेदार को पता ही नहीं है। बंदर पकड़ने की अनुमति मिलने की खुशी में निगम अधिकारी ठेकेदार को बताना ही भूल गए कि उसे काम भी शुरू करना है। जब ठेकेदार से काम शुरू करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी तक उनके पास किसी भी निगम अधिकारी का कोई फोन या लिखित में कोई आदेश नहीं मिला है।
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जब उनके पास कोई आदेश आएगा वे तभी काम शुरू करेंगे। वहीं, बंदर पकड़ने की शिकायत के लिए निगम की सफाई शाखा को एक शिकायत नंबर जारी करना होगा। इस पर आने वाली शिकायतों को निगम अधिकारी ठेकेदार को लिखित तौर पर देंगे। जिसके बाद ठेकेदार मौके पर जाकर बंदर पकड़ने के लिए पिंजरा लगाएगा और काम शुरू करेगा। सबसे पहले प्राथमिकता उस जगह को दी जाएगी जहां सबसे ज्यादा बंदर होंगे। वहीं, इस बारे में निगम अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार को तुरंत प्रभाव से सूचित किया जाएगा। इसके बाद लोगों की शिकायत सुनने के लिए शिकायत नंबर भी जारी कर जल्द ही काम शुरू करवाया जाएगा।
अभी और लग सकता है समय
बंदर पकड़ने का ठेका लेने वाले ठेकेदार ने बताया कि निगम अधिकारियों की सूचना के बाद उसे अपने कर्मचारियों को इकट्ठा करना पड़ेेगा। शिकायत के लिखित आदेशों के बाद संबंधित जगह पर जाकर पिंजरा लगाना होगा, इसके बाद बंदरों को पकड़कर कलेसर के जंगल में छोड़ कर आया जाएगा।
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इस बारे में निगम अधिकारियों को अनुमति मिलने के साथ ही सूचित कर दिया गया था। साथ ही ठेकेदार को जानकारी देने के लिए निगम अधिकारियों को बोल दिया गया है। शिकायत दर्ज कराने के लिए नंबर भी जल्द जारी कर दिया जाएगा। बहुत जल्द बंदर पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा।
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- अवनीत कौर, मेयर।
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