पानीपत। जिले में भूजल लगातार घट रहा है। साथ ही कई क्षेत्रों में पानी जहरीला हो रहा है। समालखा व बापौली क्षेत्र को भूजल लगातार नीचे जाने से डार्क जोन घोषित किया गया है। सरकार के जागरूकता अभियान व योजनाएं भी कागजों व कार्यक्रमों के आयोजनों तक सिमटी हुई हैं।
शहर की ही बात करें तो यहां भूजल 120 फीट पर है। सेक्टर-29-टू समेत औद्योगिक क्षेत्र में पानी पीने लायक तक नहीं है। यहां पानी में बीओडी सामान्य से भी अधिक है। विशेषज्ञों की माने तो हर साल एक से तीन मीटर तक भूजल नीचे जा रहा है। ये आने वाले समय में खतरे के संकेत भी हैं।
पानीपत के औद्योगिक शहर होने के चलते भूजल का दोहन खेतों के साथ उद्योगों में भी लगातार हो रहा है। उद्योगों की बात करें तो करीब 20 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। सभी इकाइयां पानी आधारित हैं।
डाई हाउस में पानी की सबसे अधिक खपत होती है। शहर में अलग-अलग स्थानों के अलावा सेक्टर-29 पार्ट-टू में अलग से डाई हाउस है। वहीं दूसरी बड़ी खपत कृषि क्षेत्र में होती है। जिले में मुख्यत गेहूं और धान की खेती की जाती है। कृषि विभाग धान की सीधी बिजाई के लिए जागरुकता अभियान चलाती है। इसमें अपेक्षाकृत सुधार नहीं हो सका है।
तीन साल में दोगुना हुए ट्यूबवेल ः नगर निगम क्षेत्र में पेयजल के लिए ट्यूबवेल तेजी के साथ लगाए जा रहे हैं। तीन साल में इनकी संख्या दोगुना हो गई है। आज करीब 700 ट्यूबवेल हैं। शहर में हर रोज 75 से 80 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाती है। नगर निगम और जन स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी सप्लाई करने का दावा कर रहा है।
शहर की बात करें तो भूजल के लगातार घटने से सरकारी ट्यूबवेल लगातार ठप हो रहे हैं। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग रेनीवेल प्रोजेक्ट पर तेजी के साथ काम कर रहा है। भाजपा ने नगर निगम चुनाव में इसे अपने संकल्प पत्र में भी शामिल किया है।