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लिफ्ट में फंसकर लैब अटेंडेंट की मौत, परिजनों का हंगामा

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पानीपत। सेक्टर 11-12 स्थित एसडीवीएम सीनियर विंग स्कूल की लिफ्ट में पांच घंटे तक फंसे रहने से स्कूल के ही लैब अटेंडेंट की मौत हो गई। हादसा शुक्रवार दोपहर तीन बजे का है और उसका शव रात आठ बजे गैस कटर से लिफ्ट का दरवाजा काटकर निकाला जा सका। परिजनों का आरोप है कि शाम छह बजे मैनेजमेंट की ओर से कोई भी नजर नहीं आया और शाम साढ़े छह बजे मैकेनिक बुलाए गए। परिजनों ने चार घंटे तक हंगामा किया। परिजनों ने स्कूल मैनेजमेंट पर कार्रवाई की मांग की है।
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हलवाई हट्टा निवासी अमित गुप्ता ने बताया कि उसका जुड़वा भाई अंकित गुप्ता (34) स्कूल में लैब अटेंडेंट था। उसकी 26 नंवबर 2020 में मीनाक्षी से शादी हुई थी। अंकित पिछले 11 साल से सेक्टर 11-12 स्थित एसडीवीएम स्कूल की सीनियर विंग में लैब अटेंडेंट के रूप में काम करता था। शुक्रवार की दोपहर 3:58 बजे जूनियर विंग की एडमिनिस्ट्रेटर रेणुका सिंगला ने कॉल कर अंकित के लिफ्ट में फंसने की सूचना दी।
वह बहन मनीषा गुप्ता और जीजा रविंद्र जैन के साथ स्कूल पहुंचे। दूसरी मंजिल पर अंकित लिफ्ट के गेट में फंसा था। उसकी गर्दन ऊपर और धड़ लिफ्ट में फंसा था। उस समय स्कूल के मैनेजमेंट के पदाधिकारी और स्कूल की प्रिंसिपल मौके पर ही मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने मैनेजमेंट के हाथ जोड़कर जल्द से जल्द मैकेनिक बुलाकर भाई को बचाने की विनती की, लेकिन मैनेजमेंट ने कुछ नहीं किया। हंगामा करने पर शाम साढ़े छह बजे दिल्ली से मैकेनिक बुलाए गए, जिन्होंने रात करीब आठ बजे गैस कटर से लिफ्ट का दरवाजा काटकर शव को बाहर निकाला।
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परिजनों का आरोप, मैनेजमेंट के छह स्कूल, लेकिन मैकेनिक किसी में नहीं
परिजनों ने आरोप लगाया कि सनातन धर्म एजुकेशनल सोसायटी के छह स्कूल हैं और सभी में लिफ्ट लगी है। एसडीवीएम सीनियर विंग में भी दो लिफ्ट लगी है, लेकिन किसी भी स्कूल में लिफ्ट के मेंटेनेंस के लिए मैकेनिक नहीं है। मैनेजमेंट की लापरवाही से उनके परिवार ने एक सदस्य को खो दिया है।
दिल्ली से आते थे कर्मचारी, समय-समय कर कराई जाती है सर्विस
मैनेजमेंट के एक पदाधिकारी ने बताया कि सभी लिफ्ट दिल्ली की कंपनी की हैं। वहीं से समय-समय पर कंपनी का मैकेनिक लिफ्ट की सर्विस के लिए आता है। लिफ्ट में खराबी होने पर कॉल करके बुलाया जाता है। हालांकि हादसे के संबंध में स्कूल मैनेजमेंट के पदाधिकारी बोलने से बचते रहे।
परिजन बोले: बच्चा नहीं था अंकित, जिसे चलना नहीं आता था
अंकित की बहन मनीषा गुप्ता ने आरोप लगाया कि यह सोची समझी साजिश हो सकती है। उसके भाई की हत्या हुई है। मैनेजमेंट का कोई पदाधिकारी सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज भी नहीं दिखाई। भाई पिछले 11 साल से स्कूल में काम करता था। वह बच्चा नहीं था कि उसे चलना या लिफ्ट में चढ़ना नहीं आता था।
मैनेजमेंट ने नहीं दी सूचना, एक घंटे बाद पड़ोसी ने दी
परिजनों का आरोप है कि तीन बजे अंकित लिफ्ट में फंस गया था, लेकिन मैनेजमेंट कॉल नहीं किया गया। एक घंटे बाद जूनियर विंग में काम करने वाली पड़ोसी रेणुका सिंगला ने जानकारी दी। जब स्कूल पहुंचे तो अंकित से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन वह बेसुध था। समय पर मैकेनिक न आने की वजह शाम करीब साढ़े पांच बजे से उसकी नाक से खून निकलने लगा। दो घंटे तक वह जिंदगी और मौत से जूझता रहा, बहन का कहना है कि समय पर मैकेनिक आ जाता तो भाई की जान बच जाती।
ये हो सकते हैं कारण
मैकेनिक के आने पर लिफ्ट का फर्श टूटा मिला। अंकित का सिर पर ऊपर और धड़ नीचे लटका हुआ था। आशंका है कि लिफ्ट का फर्श टूटा होने के कारण अंकित नीचे चला गया या फिर 30 एमएम से ज्यादा जगह छोड़ने पर अंकित का पैर फंस गया।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, रात करीब आठ बजे शव को लिफ्ट से निकालकर सामान्य अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है, शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिजनों की ओर से अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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- मंजीत सिंह, चांदनीबाग थाना प्रभारी
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