पानीपत। नगर निगम के संपत्ति कर से परेशान दपंती की व्यथा पर शुक्रवार को डीसी ने संज्ञान लिया है। उपायुक्त वीरेंद्र दहिया ने दपंती को फोन कर उनके समाधान का आश्वासन दिया। वहीं, निगम अधिकारियों को भी लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को फटकार लगाने के निर्देश दिए। बता दें कि राज नगर का रहने वाला दंपती पिछले आठ माह से अपनी मकान के संपत्ति कर को ठीक करवाने के लिए निगम में चक्कर काट रहा था।
वीरवार को निगम में पहुंची परेशान महिला ने इतना तक कह दिया कि साहब मैं पिछले आठ माह से अपनी प्रॉपर्टी आईडी पर निगम की ओर से लगाया गया गलत टैक्स ठीक करवाने के लिए निगम में चक्कर काट रही हूं लेकिन आज तक मेरी आईडी पर लगा टैक्स ठीक नहीं हुआ है। इसके लिए मैंने निगम में शिकायत और प्रार्थना पत्र भी दिए। कमेटी में दो बार बुलाया गया लेकिन टैक्स ठीक नहीं किया। आप मेरी कानों की बालियां और पाजेब रख लो लेकिन मेरी परेशानी का हल कर दो। हम पहले ही काफी परेशान हैं हमें और परेशान ना करो।
इसे अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर शुक्रवार को डीसी वीरेंद्र दहिया ने संज्ञान लिया और दपंती से फोन पर बातचीत की।
राज नगर के रहने वाले सुरेंद्र ने बताया कि शुक्रवार को उनके पास डीसी की ओर से फोन आया था। उनसे पूरा प्रकरण पूछा गया। उनकी शिकायत भी नोट की ओर आश्वासन दिया कि अब उनका जल्द काम हो जाएगा। इसके बाद डीसी ने निगम अधिकारियों को लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती बरतने के आदेश दिए।
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ये था मामला:
दपंती का एक 50 गज का खंडहर मकान है। इस पर निगम ने 73 हजार रुपये से ज्यादा का टैक्स बनाया है। इसे ठीक करवाने के लिए दंपती पिछले करीब आठ माह से निगम में चक्कर काट रहे हैं। कमेटी में भी दो बार शिकायत दी। अधिकारियों ने मौके पर जेई को भेज रिपोर्ट तैयार कराई। उनके मकान की पैमाइश और कैटेगरी की जांच पड़ताल की। जिसमें उनका टैक्स करीब 637 रुपये बना। इसके बाद भी उसे ठीक नहीं किया गया।
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प्रॉपर्टी टैक्स ठीक कराने की ये है प्रक्रिया
गलत प्रॉपर्टी टैक्स ठीक कराना लोगों के लिए चुनौती बन चुका है। इसकी जड़ याशी के गलत सर्वे को माना जा रहा है। इसे ठीक करवाने के लिए निगम में अपनी संपत्ति और मालिक के सभी दस्तावेज संलग्न कर ऑफलाइन फाइल जमा करवानी होती है। विशेष तौर पर संपत्ति कर ठीक करवाने के लिए निगम ने एक कमेटी भी बनाई है। इसमें जेई से मौके की संपत्ति की फोटो और पैमाइश भी कराई जाती है। इसके बाद कमेटी टैक्स कम करने पर अंतिम निर्णय लेती है। खास बात ये है कि ये कमेटी ऐसे केसों पर महीने में एक दिन केवल माह के तीसरे वीरवार को ही बैठक करती है। फिलहाल निगम में कमेटी के लिए ऐसी कई फाइलें लंबित पड़ी हैं।
वर्जन-
तुंरत लिया संज्ञान-
जैसे ही वीरवार को मामला उनके संज्ञान में पहुंचा सबसे पहले उन्होंने लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को फटकार लगाई और परेशान दंपती का काम करवाने के आदेश दिए। किसी भी शहर वासी को ऐसे परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
मनी त्यागी, संयुक्त आयुक्त।