सनौली (पानीपत)। पहाड़ों से आया बारिश का पानी यमुना में लगातार बह रहा है। मौजूदा समय में करीब 45 हजार क्यूसेक पानी है। पानीपत के राणा माजरा गांव के पास पांच फीट तटबंध कटने के बाद भी प्रशासन और सिंचाई विभाग की तैयारी तेज नहीं हुई है। ठेकेदार को भागदौड़ के बाद पत्थर के पांच डंपर ही मिल पाए हैं। पत्थर के छह डंपर पहले आए हुए हैं। ये भी ठोकर लगाने में नाकाफी हैं। सिंचाई विभाग ने ऐसे में एक ठोकर पर मिट्टी के कट्टों के दो स्टड बनाए हैं। जानकारों की मानें तो मिट्टी के स्टड यमुना में आए पानी के तेज बहाव को नहीं रोक पाएंगे।
हथिनी कुंड बैराज से यमुना में पिछले कई दिन से लगातार पानी आ रहा है। सोमवार को करीब 55 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। अब यमुना में करीब 45 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। सोमवार को तेज बहाव में पानीपत के राणा माजरा गांव के नजदीक करीब पांच फीट तटबंध कट गया था। यह यमुना के पानी के साथ बह गया था। मंगलवार को प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों का मौका देखा था, लेकिन बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी यमुना पर नहीं पहुंचे। वे सिंचाई विभाग के अधिकारियों से यमुना के जलस्तर और कटाव को लेकर स्थिति का पता लेते रहे। ग्रामीणों ने आगे आकर मजदूरों की मदद की और स्टड बनाने के लिए कट्टों में मिट्टी भरवाई। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और सिंचाई विभाग आज भी अनदेखी बरत रहा है। इन सबके यमुना में ठोकर लगाने के लिए बुधवार को पत्थर पांच डंपर पहुंचे। इससे पहले छह डंपर आ चुके हैं। 11 डंपर में 12 ठोकर लग पानी मुश्किल हैं। वहीं पानी आने के बाद पत्थर को किनारे पर जमा पाना भी मुश्किल होगा।
वर्जन :
आचार संहिता के चलते ठोकर लगाने के लिए टेंडर नहीं हो सका था। इसकी परमिशन मिलते ही टेंडर कर दिया गया था। ठेकेदार ने पत्थर न मिल पाने की बात कही थी। बुधवार को पत्थर के पांच डंपर मिले हैं। अब एक ठोकर पर दो-दो स्टड बनाए गए हैं। इससे पानी तटबंध पर कटाव नहीं कर पाएगा।
सर्बजीत, एसडीओ, सिंचाई विभाग, पानीपत।