पानीपत। हरियाणा में भूजल स्तर के लिहाज से स्थिति प्रतिकूल होने लगी है। भूजल के अत्यधिक दोहन की प्रमुख वजह धान की फसल भी है। साल दर साल धान का एरिया बढ़ रहा है। पिछले दो दशक में हरियाणा में भूजल स्तर 10.18 मीटर तक नीचे चला गया है। पानीपत में ही बीते 22 सालों में भूजल स्तर 13.84 मीटर गिरकर 8.53 मीटर से 22.97 मीटर जा चुका है। बीते दो सालों में ही भूजल स्तर करीब 1.80 मीटर नीचे गिर चुका है। धान बाहुल्य इलाके में तो भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरा है। जिला पानीपत में करीब 85 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने के लिए करीब 25 हजार ट्यूबवेल लगे हुए हैं। इस लिहाज से औसतन 3.5 हेक्टेयर के लिए एक नलकूप स्थापित है। सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के बारे में यहां के 90 फीसदी किसान नहीं जानते। दूसरी ओर सरकार ने अब धान के रकबे को कम करने की पहल की है। सरकार की ओर से धान के विकल्प के रूप में बोई जाने वाली फसलों के लिए अनुदान देने की योजना लागू की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि योजना लागू होने के बाद धान के रकबे में कुछ कमी आई है। इससे प्रदेश में भूजल के लिहाज से सुधार देखने को मिल सकता है।
दरअसल हरियाणा में धान की खेती जल संकट पैदा कर रही है। राज्य गठन के समय प्रदेश में धान का रकबा 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर था। अब यह बढ़कर लगभग 15 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। अकेले पानीपत जिले में ही करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल उगाई जाती है।
करीब 30 गुणा बढ़ चुकी है नलकूपों की संख्या
हरियाणा में पिछले 50 साल में न केवल धान का रकबा लगभग आठ गुणा बढ़ा है, बल्कि नलकूपों की संख्या 30 गुणा बढ़ गई है। 1966 में डीजल आधारित 7767 जबकि बिजली आधारित 20190 नलकूप थे। वर्ष 2017-18 में नलकूपों की संख्या बढ़कर 622343 हो चुकी है। यह भी चिंतनीय तथ्य है कि 1966 में 3 लाख 2 हजार हेक्टेयर भूमि नलकूपों से सिंचित होती थी। अब 17 लाख 21 हजार हेक्टेयर भूमि भी नलकूपों के जरिए सिंचित हो रही है।
किसानों को अपनानी होगी फसल विविधिकरण की प्रक्रिया : आर्य
कृषि विभाग पानीपत के उपनिदेशक वीरेंद्र आर्य का कहना है कि किसानों द्वारा धान की फसल के कारण भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। भूजल का गिरता स्तर चिंता का विषय है। भूजल के घटते स्तर को देखते हुए किसानों को धान की बजाय दूसरी फसलें उगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। किसानों को चाहिए कि वे फसल विविधिकरण की प्रक्रिया अपनाएं, ताकि घटते भूजल स्तर को रोका जा सके।