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18 जुलाई को अबूझ मुहूर्त, 20 को देवशयनी एकादशी, फिर 4 माह नहीं बजेगी शहनाई

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आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि देवशयनी एकादशी के रूप में मनाई जाती है। इस बार यह एकादशी 20 जुलाई को पड़ रही है। इसके बाद चतुर्मास शुरू हो रहा है। इसके बाद मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन और जनेऊ 14 नवंबर तक वर्जित रहेंगे। 118 दिन देव शयन करेंगे। देवशयनी एकादशी से बंद होने वाले मांगलिक कार्य प्रबोधिनी एकादशी के साथ प्रारंभ होंगे। रविवार को अबूझ मुहूर्त है, इसके बाद 15 नवंबर से शहनाइयां गूंज सकेंगी। नवंबर में इस साल तीन एकादशी होंगी, इस साल 25 एकादशी होंगी। महीने की पहली तारीख को रमा एकादशी, 15 को देवउठनी एकादशी और फिर 30 को महीने के अंतिम दिन उत्पन्ना एकादशी होगी। ऐसी स्थिति कई साल में तिथियों की घट-बढ़ने पर बनती है। वैसे साल में कुल 24 एकादशी होती हैं, पर इस साल तक 25 हो जाएगी।
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देवों ने पिछले वर्ष 148 दिन किया था विश्राम
पिछले वर्ष इन दिनों में अधिकमास होने से एक माह अधिक यानी 148 दिन तक देवों ने विश्राम किया था। इस बार ये 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी से 15 नवंबर को अवधि में क्षीर सागर में विश्राम अवस्था में रहेंगे। सृष्टि संचालन का उनका प्रभार इस अवधि में भगवान भोलेनाथ के पास रहेगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकेंगे, पर विवाह समेत मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
श्रावण माह में होगी शिव भगवान की विशेष पूजा
पंडित राधे-राधे ने बताया कि चतुर्मास अवधि में श्रावण मास आएगा। विशेष तौर पर एक महीने भगवान शिव की विशेष पूजा होगी। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक भगवान गणेश पूजे जाएंगे, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आएगी। तब कन्हैया के लीला प्रसंग शुरू होंगे। नवंबर में देवउठनी एकादशी पर जागने पर उनकी पूजा की जाएगी।
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खास होता है आषाढ़ महीना
हिंदू कैलेंडर में आषाढ़ साल का चौथा माह है। आषाढ़ सनातन धर्म में धार्मिक माह भी माना गया है। इस माह में भगवान विष्णु, भगवान शिव व मां दुर्गा की गुप्त नवरात्र के दौरान पूजा की जाती है। माना जाता है कि इसी महीने में सभी देवी देवता विश्राम के लिए जाते हैं। वहीं भारत में इस समय काफी बारिश होने के कारण इस माह को वर्षा ऋतु का महीना भी कहा जाता है।
20 नवंबर से 29 अप्रैल 2022 तक शादियों के 22 मुहूर्त
कोरोना के कारण अप्रैल और मई में शादियों के आयोजन पर प्रतिबंध से कई बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। कुछ लोग 18 जुलाई भंडली नवमी को अबूझ मुहूर्त मानकर भी विवाह करेंगे। पंडित जयपाल शर्मा ने बताया कि 20 नवंबर से लेकर 29 अप्रैल 2022 तक शादियों के 22 मुहूर्त हैं, जिसमें शहनाई बजेगी।
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