पानीपत। रेमडेसिविर इंजेक्शन के जरिए कोरोना संक्रमितों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। कोई तय कीमत नहीं, जुबान पर जितनी कीमत आ गई, उतनी ही इंजेक्शन के लिए चुकानी होगी। इंजेक्शन बेचने से पहले तीमारदारों को दिनभर धक्के खाने के लिए छोड़ दिया जाता है। परिजन शहर के हर मेडिकल स्टोर से लेकर सिविल सर्जन कार्यालय तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिलता। जब परिजन अस्पताल लौटते हैं तो स्टाफ रात तक इंतजार करने को कहता है। रात 10 बजे के बाद अस्पताल का स्टाफ ही इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मोटी रकम मांगता है। परिजनों को एक मोबाइल नंबर या पर्ची देकर अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर भेजा जाता है, जहां पर 25 से 30 हजार रुपये में रेमडेसिविर उपलब्ध हो जाता है। इस पूरे खेल में अस्पताल का स्टाफ और मेडिकल स्टोर शामिल है, जो आपदा में लोगों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। ये खेल पानीपत में पिछले एक माह से चल रहा है।
दिल्ली के रोगी भी पानीपत में रेमडेसिविर के लिए कर रहे संपर्क
रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए हर जगह मारामारी है। दिल्ली के रोगी भी पानीपत में ही संपर्क कर रहे हैं। पानीपत के निजी अस्पतालों में दिल्ली के रहने वाले 300 से अधिक संक्रमित भर्ती हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी जोरों पर है, यहां तक कि नकली इंजेक्शन भी बेचे जा रहे हैं।
केस-1
हलवाई हट्टे निवासी कोरोना पॉजिटिव युवक असंध रोड स्थित निजी अस्पताल में दाखिल है। चार दिन पहले डॉक्टर ने उन्हें रेमडेसिविर लाने के लिए कहा। इसके परिजन इंजेक्शन के लिए शहर में घूमते रहे, लेकिन कहीं भी इंजेक्शन नहीं मिला। रात 10 बजे अस्पताल के स्टाफ ने सामने वाले मेडिकल स्टोर का नंबर दिया और उसके हाथ में एक पर्ची दी। रात करीब 11 बजे कार में दो युवक आए और उन्हें 50 हजार रुपये के दो इंजेक्शन मिल गए।
केस-2
दिल्ली निवासी कोरोना संक्रमित महिला सनौली रोड स्थित निजी अस्पताल में दाखिल हैं। उसके परिजन दो दिन तक दिल्ली और पानीपत के मेडिकल स्टोर पर इंजेक्शन खोजते रहे, लेकिन कहीं भी इंजेक्शन नहीं मिला। रात को अस्पताल के वार्ड ब्वॉय ने इन्हें एक मेडिकल स्टोर संचालक के पास भेजा, जहां से 30 हजार रुपये का इंजेक्शन मिल गया।
केस-3
देशराज कॉलोनी का एक युवक असंध रोड स्थित अस्पताल में दाखिल था। उसको अस्पताल के स्टाफ ने 22 हजार रुपये में इंजेक्शन उपलब्ध कराया। हालांकि इस इंजेक्शन का कोई फायदा नहीं हुआ, इसके लगने के कुछ देर बाद ही कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। डॉक्टरों ने शव परिजनों को सौंप दिया।
केस-4
राजीव कॉलोनी निवासी एक महिला कोरोना संक्रमित हैं। सनौली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल हैं। इनके बेटे तीन दिन पहले तक इंजेक्शन के लिए धक्के खाते रहे। डॉक्टरों ने ये साफ कर दिया कि अगर इंजेक्शन नहीं मिला तो मां का बचना मुश्किल है। कहीं से इंजेक्शन नहीं मिला तो स्टाफ ने रात में 25 हजार में इंजेक्शन उपलब्ध करा दिया।
डॉक्टर के लेटरपैड पर लिखवाकर आए, स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध कराएगा इंजेक्शन : डॉ. ग्रोवर
लोगों के बीच इंजेक्शन के लिए काफी भय बन गया है। लोगों से अपील है कि वह संयम से काम लें। हर रोगी के लिए ये इंजेक्शन जरूरी नहीं है। अगर कोई इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहा है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। अगर किसी को इंजेक्शन चाहिए तो वह अपना आधार कार्ड और डॉक्टर के लेटरपैड पर लिखवाकर लाएं। स्वास्थ्य विभाग इंजेक्शन उपलब्ध कराएगा।
-डॉ. संजीव ग्रोवर, सिविल सर्जन