पारा बढ़ता जा रहा है, लेकिन खराब पड़े ट्यूबवेल को नगर निगम कर्मचारी अल्टीमेटम के बावजूद चालू नहीं कर सके हैं। जिले में पब्लिक हेल्थ और नगर निगम लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराता है, लेकिन दोनों विभागों के करीब 40 ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। जिससे दो दर्जन से अधिक कालोनियों के लोग पीने का पानी नहीं मिलने से परेशान हैं। सदन की बैठक में पार्षदों के हंगामे के बार नगर आयुक्त ने खराब पड़े ट्यूबवेलों की मरम्मत के लिए पांच अप्रैल तक का वक्त दिया था, लेकिन यह ट्यूबवेल ठीक नहीं किए जा सके। यह दिक्कत सबसे ज्यादा आउटर कालोनियों में है, जहां पानी का टैंकर खरीदकर लोग काम चला रहे हैं।
नगर निगम सीमा में निगम की ओर से लगाए 178 और जन स्वास्थ्य विभाग के 301 ट्यूबवेल हैं। इनमें से करीब 50 ट्यूबवेल अपनी क्षमता से कम पानी दे रहे हैं, जिससे लोगों कम पानी मिल रहा है। करीब 40 ट्यूबवेल बंद हो चुके हैं। निगम इंजीनियरों ने खराब ट्यूबवेलों का कारण पानी के जलस्तर को घट जाना बताया है। हाल ही में निगम की एक रिपोर्ट के अनुसार निगम एरिया में 118 ट्यूबवेलों का निरीक्षण किया गया था। इनमें से 74 ट्यूबवेल चालू मिले थे, बाकी के दो भागों में 44 ट्यूबवेल को शामिल किया गया था, जिनके बिजली कनेक्शन करवाए जाने बाकी थे। अब निगम का दावा है कि अधिकतर ट्यूबवेलों के बिजली कनेक्शन करवा दिए गए हैं।
यहां पानी की सबसे ज्यादा दिक्कत
वार्ड नंबर चार में दो ट्यूबवेल खराब हैं। दोनों देशराज कॉलोनी में है। वार्ड नंबर पांच में एक ट्यूबवेल खराब है। इसके लिए निगम ने शार्ट टर्म टेंडर लगाया है। वार्ड नंबर 23 की वीवर्स कालोनी और वार्ड 21 सौधापुर में भी एक-एक ट्यूबवेल खराब है। इसके अलावा वार्ड नंबर चार में चार ट्यूबवेल बंद पड़े हैं।
चार ट्यूबवेल बंद हो गए, लोग पानी के मोहताज : कटारिया
वार्ड नंबर सात के अंतर्गत चार ट्यूबवेल बंद हो चुके हैं। निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शहर के लोगों की चिंता ही नहीं है। विभाग पानी तक उपलब्ध करवाने में नाकामयाब साबित हुए हैं। परेशानी हल नहीं हुई तो अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
अशोक कटारिया, पार्षद, वार्ड नंबर सात।
मंगवाना पड़ता है पानी का टैंकर : बजाज
वार्ड में पीने के पानी की गंभीर समस्या है। लोग पानी के लिए कार्यालय के बाहर आकर धरना प्रदर्शन तक करते हैं। वे रोजाना निगम अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करवाते हैं। लोगों की परेशानी को देखते हुए रोज पानी का टैंकर मंगवाना पड़ता है।
-अनिल बजाज, पार्षद, वार्ड नंबर पांच
चलाने के लिए ऑपरेटर नहीं : अश्वनी
ऑपरेटर नहीं हैं, लोगों को खुद ही ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। जिससे ट्यूबवेल ज्यादा देर तक चलते हैं। इसकी वजह से कई बार फुंक जाते हैं और फिर पानी का संकट पैदा होता है। यहां ऑपरेटर रखने के लिए निगम से कई बार गुहार लगाई जा चुकी है।
- अश्विनी ढींगड़ा, पार्षद, वार्ड-23
दो कॉलोनियों के हजारों लोग परेशान : नागपाल
वार्ड की देशराज कॉलोनी के दोनों भागों में दो ट्यूबवेल खराब हुए हैं। इसे लेकर कई बार निगम अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अधिकारी कार्रवाई नहीं करते। लोग बार-बार हमें शिकायत करते हैं। लोगों को पानी भरने के लिए दूसरी कॉलोनी जाना पड़ता है।
- रविंद्र नागपाल, वार्ड नंबर चार।
निगम एरिया में ज्यादातर खराब हुए ट्यूबवेल ज नस्वास्थ्य विभाग के हैं। निगम द्वारा लगाए गए तकरीबन सभी ट्यूबवेल चालू हैं। कुछ नए ट्यूबवेलों का एस्टीमेट बनाकर उनके शार्ट टर्म टेंडर लगाए जा रहे हैं। जिसके तहत 15 दिन के भीतर नया ट्यूबवेल लगाया जाएगा। वहीं, अभी तक जनस्वास्थ्य विभाग निगम में मर्ज नहीं हो सका है। मर्ज होने के बाद इनके ट्यूबवेल भी निगम में शामिल होंगे। जिनका ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस भी निगम करेगा।
-महिपाल सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम, पानीपत।