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ुराने जीआईएस सर्वे रिकार्ड से याशी का नया सर्वे रिकार्ड नहीं हुआ इंटिग्रेटेड, 30 प्रतिशत का नहीं हो रहा मिलान

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खामियों से भरे नए प्रॉपर्टी टैक्स सर्वे के बाद अब शहर के लोगों के लिए पुराने टैक्स के सर्वे का रिकार्ड मुसीबत बन गया है। पुराने सर्वे के रिकार्ड से नए सर्वे का इंटिग्रेशन केवल 70 प्रतिशत ही हो पाया है। 30 प्रतिशत प्रॉपर्टी अभी इस मिलान से अछूती हैं। वहीं शहर के लोगों को अभी तक उनकी प्रॉपर्टी आईडी नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा टैक्स में करेक्शन करवाने के बाद भी वह सही नहीं हो रहा है। गलत रिकार्ड को सही करने के लिए शुक्रवार को भले ही सर्वे कंपनी के कर्मचारियों को पालिका बाजार निगम में बैठाया गया हो, लेकिन किसी भी समस्या का हल नहीं हो पाया है। परेशान लोगों ने हंगामा करते हुए सर्वे कंपनी के कर्मचारियों को जमकर खरी खोटी सुनाई। एक शहरवासी की प्रॉपर्टी आईडी को जब कंपनी प्रबंधक ने खुद पोर्टल पर चेक किया तो ये मकान की जगह स्कूल निकला।
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निगम आयुक्त, संयुक्त आयुक्त, ईओ, डीएमसी व मेयर की गैर मौजूदगी में परेशान शहरवासी सीनियर डिप्टी मेयर केे कार्यालय पहुंचे और दुष्यंत भट्ट को समस्याएं बताईं। भट्ट ने मौके पर याशी के प्रतिनिधियों के साथ निगम अधिकारियों को मौके पर बुला लिया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटे तक नए सर्वे, पुराने सर्वे और निगम की कार्यप्रणाली ने सबको उलझाए रखा। जिसके बाद निष्कर्ष निकला कि सर्वे कंपनी याशी, पुराने सर्वे कंपनी जीआईएस और निगम अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक होगी। दूसरी ओर नई सर्वे कंपनी ने इसका ठीकर पुरानी सर्वे कंपनी और निगम के सिर फोड़ा है। सर्वे कंपनी का कहना है कि पिछला सर्वे गलत किया गया है, जिस आज तक न तो सर्वे कंपनी सही कर पा रही है और न ही निगम ने उसे सही किया है।
क्यूआर कोड में होगी पूरी जानकारी : याशी
याशी कंपनी के मैनेजर सुभाष जैन ने कहा कि आगामी दस साल तक दोबारा सर्वे नहीं होगा। सर्वे की फाइनल स्टेज में हर घर के बाहर एक नंबर प्लेट लगेगी, जिसमें क्यूआर कोड लगाया जाएगा। जिसमें हर प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी होगी। उनका कहना है कि निगम का पुराना सर्वे जीआईएस कंपनी ने किया था। इस डेटा में निगम के अंदर करीब 1.39 लाख प्रॉपर्टी थी। अब उनके सर्वे में करीब 1.75 लाख प्रॉपर्टी हैं। पुराने सर्वे के रिकार्ड से उनके सर्वे का रिकार्ड केवल 70 प्रतिशत ही इंटिग्रेटेड हो पाया है।
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कंपनी अधिकारियों व निगम से इस पर चर्चा की गई है। अब तक इसका केवल एक ही समाधान सामने आया है कि कंपनी हर घर तक प्रॉपर्टी डिटेल का दस्ती नोटिस पहुंचाए। जिस पर लोग निगम में आपत्ति दर्ज करवा सकें। इसके अलावा नए और पुराने सर्वे के रिकार्ड, इनके मिलान को लेकर सोमवार को बैठक की जाएगी।
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-दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर, नगर निगम, पानीपत।
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