आजादी के पहले से चली आ रही समालखा की रावण दहन की प्रथा को इस बार कोरोना ने थाम दिया, जिस कारण इस बार आदर्श ड्रामाटिक क्लब के सदस्य ने फैसला लिया कि वह समालखा प्रशासन की बात को मानते हुए अनाज मंडी में रावण दहन नहीं करेंगे। समालखा की यह रामलीला 1935 से चली आ रही थी। जिसमें हर साल रामलीला में सभी सदस्य किरदार निभाते थे। यह समालखा की एकलौती रामलीला क्लब थी जो आज तक कभी नहीं रुकी थी। क्लब की रामलीला रात आठ बजे से 12 बजे तक चलती थी, जिसमें हजारों दर्शक रामलीला देखने आते थे ।
क्लब की रामलीला के मंचन को देखने के लिए समालखा के 20 से ज्यादा गांव के लोग आते थे। दशहरा पर रावण दहन देखने के लिए एक लाख से ज्यादा लोग आते थे। क्लब का कहना है कि इस बार भी कई गांव से लोग देखने के लिए आए थे, लेकिन आने के बाद उनको बताया गया कि इस बार कोरोना के भय से रामलीला का मंचन नहीं किया जा रहा है। बताए जाने के बाद वह नाराज होकर वहां से अपने घर को चले गए।
क्लब के सदस्य बोले-
2000 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि मैंने रावण का किरदार नहीं निभाया। भगवान करे की सभी स्वस्थ रहें, ताकि अगली बार इससे भी अच्छे तरीके से रामलीला का मंचन हो सके।
डॉक्टर रविंद्र
रामलीला देखने 10 हजार से ज्यादा लोग आते थे। वहीं रावण दहन देखने एक लाख से ज्यादा लोग अपने परिवार के साथ आते थे। इस बार हमारे 100 से ज्यादा कलाकार अपना किरदार नहीं निभा पा।
संजय बंसल