करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी दीवाली तक नगर निगम शहर को जगमग नहीं कर पाएगा। इसका सबसे बड़ा कारण है कि करीब दो करोड़ रुपये कीमत की एलईडी स्ट्रीट लाइट के टेंडर खुलने एवं वर्क आर्डर जारी हुए करीब दो माह बाद भी एलईडी लाइटों की डिलिवरी नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं निगम के पास फंड की कमी होने से लाइटों की मरम्मत का काम भी बंद पड़ा है। ठेकेदार का कहना है कि जब तक उनकी रुकी हुई पेमेंट निगम नहीं करता, तब तक मरम्मत की सामग्री की सप्लाई नहीं कर पाएंगे। निगम को करीब पांच लाख रुपये का भुगतान करना बाकी है।
गौरतलब है कि शहर को जगमग करने के लिए निगम ने करीब दो करोड़ रुपये से करीब दस हजार नई एलईडी स्ट्रीट लाइटों को लगाना था। इसके अलावा पुराने करीब साढ़े 16 हजार लाइटों में से बंद एवं खराब पड़ी लाइटों को ठीक करना था। इसके लिए करीब 55 लाख रुपये से मैनपावर का टेंडर छह माह के लिए लगाया गया था। वहीं करीब 45 लाख रुपये कर मरम्मत सामग्री की सप्लाई का टेंडर दिया गया था। अब निगम के पास बजट का अभाव है, जिससे न तो नई स्ट्रीट लाइटों के ठेकेदार को पेमेंट का भुगतान नहीं हो पाया है और न ही मरम्मत की सामग्री की सप्लाई का काम सिरे चढ़ पाया है। केवल मैनपॉवर के सहारे ही निगम शहर के लोगों व जनप्रतिनिधियों को आश्वासन दे रहा है।
निगम एक्सईएन का हुआ तबादला
दूसरी ओर लाइटों के चार्ज लिए एक्सईएन जीपी वाधवा का भी निगम से तबादला हो चुका है। इसका चार्ज भी अभी तक अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर आयुक्त द्वारा दूसरे अधिकारियों को दिया गया है। अधिकारी फिर से निगम लाइटों को पूरा रिकार्ड तलब करने में जुट गए हैं। निगम की तीसरी ब्रांच की सीट अभी भी खाली है।
जनप्रतिनिधियों में रोष
निगम द्वारा लाइटों को मरम्मत कराने और नई स्ट्रीट लाइट लगवाने में ढीला रवैया अपनाए जाने से जनप्रतिनिधि भी नाखुश हैं। इसे लेकर कई बार विधायक, मेयर व आयुक्त को गुहार लगा चुके हैं। निगम सदन में भी लाइटों को लेकर हंगामा हो चुका है, लेकिन अभी तक निगम इन पर पूरा फोकस नहीं कर पाया है।
आयुक्त सुशील कुमार का कहना है कि निगम द्वारा लाइटों को जल्द मंगवाया जा रहा है। इसे लेकर एजेंसी को निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। वहीं, मरम्मत सामग्री की सप्लाई के लिए ठेकेदार से कहा गया है। जहां तक पेमेंट की बात है, इसका भुगतान नियमानुसार करवाया जाएगा।