संवाद न्यूज एजेंसी
आदर्श नगर की 72 वर्षीय ओमी देवी ने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है इसलिए यह महीना पवित्र माना जाता है। पहले सावन के पूरे महीने पवित्रता और सात्विकता का पालन किया जाता था। लोग तब सावन के महीने में लोहे से बनी चीजें खरीदना अशुभ मानते थे इसलिए पूरे महीने लोहे की वस्तुओं की खरीदारी भी नहीं की जाती थी। सावन का महीना शुरू होते ही विवाहिता मायके चली जाती थी लेकिन समय के साथ सब बदल रहा है। पहले वाली पवित्रता, सात्विकता और रीति-रिवाजों का पालन अब नाम मात्र रह गया है। लोग समय के साथ स्वयं को तो बदल ही रहे, साथ ही रीति-रिवाजों को भी बदल रहे हैं।
सावन के पूरे माह मायके में रहती थीं विवाहिताएं
20 साल पहले जब उनकी शादी हुई थी तो वह पूरा सावन मायके में रहती थी क्योंकि बुजुर्गों का मानना है कि यह महीना पवित्र होता है। इसलिए इस महीने की पवित्रता बनाए रखने के लिए पहले विवाहित युवतियां मायके में रहती थी लेकिन अब यह सब गांव में ही देखने को मिलता है वह भी सिर्फ दिखावे का। विवाहिता युवतियां मायके जाती हैं तो एक या दो दिन में वापिस आ जाती हैं। अब पहले की तरह पूरा महीना मायके में न कोई युवती रहती है और न ससुराल वाले रहने देते हैं। लोग रीति-रिवाजों को छोड़ने लगे हैं। समय के साथ बदलाव जरूरी है लेकिन रीति-रिवाजों, परंपराओं को भूलना सही नहीं है।
- सुनीता, खटीक बस्ती