हर घर शौचालय स्कीम के बजट का आवंटन आज तक निगम से सुलझ नहीं पाया है। इसके लिए मिलने वाले 14 हजार रुपये अब तक लाभार्थियों को मिल नहीं पाए हैं। लोगों ने निर्माण सामग्री खरीदकर शौचालय तो बनवाए और पांच वर्ष फाइल भी नगर निगम में जमा करा दी। फाइल जमा कराते समय निगम ने निर्माण सामग्री के बिल नहीं मांगे लेकिन अब इनसे पांच वर्ष पुराने बिल मांगे जा रहे हैं। लाभार्थियों का कहना है कि अगर निगम को बिल चाहिए थे तो पांच वर्ष तक इंतजार क्यों किया। अब पुराने बिल कहां से लाएंगे।
दूसरी ओर निगम के पास शौचालय बनवाने के लिए करीब साढ़े चार हजार आवेदन आए। जिनमें से 1650 आवेदन स्वीकार भी कर लिए, लेकिन इनको इनकी पहली किश्त की पूरी राशि यानी 7 हजार की जगह महज 2 हजार रुपये देकर ही टरका दिया गया। बाकी करीब 300 आवेदनकर्ताओं में से किसी को 3 तो किसी को 5 हजार रुपये ही मिल पाए।
तहसील कैंप के सुधीर नगर निवासी नरेश कुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने निगम की इस स्कीम के लिए अगस्त 2016 को आवेदन किया था। पिछले पांच साल से उन्हें घुमाया जा रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत निगम आयुक्त, डीसी, मुख्य सचिव हरियाणा समेत सीए विंडो तक पर लगाई। उनकी शिकायत तक को फर्जी हस्ताक्षर कर डिस्पोज ऑफ करने की तैयारी तक कर दी। जिसका उनके पास की गई कॉल वेरिफिकेशन से खुलासा हुआ। अब निगम पांच साल पहले के बिल मांग रहा है।
ये थी जरूरतमंद लोगों की योजना जो पूरी नहीं कर पाया निगम
2014 में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने आईएचएचएल यानी इंडीविजुअल हाउसहोल्ड लैटरीन स्कीम के अंतर्गत आम आदमी को खुले में शौच करने से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। जिन लोगों के घरों में शौचालय की सुविधा नहीं थी, उनको घर में ही शौचालय बनाने के लिए सरकार की तरफ से 14 हजार रुपये सहायतार्थ राशि दी जानी थी। जो सात-सात हजार कर दो किस्तों में आनी थी। पहली किस्त आवेदन करने के बाद फिजिकल वेरिफिकेशन कर अप्रूवल देने और दूसरी किस्त शौचालय का निर्माण पूरा होने पर मिलनी थी।
फिजिकल वेरिफिकेशन करवा रहे हैं : सीटीएल
जो आवेदनकर्ता पुराने थे और जिन्हें योजना का लाभ नहीं मिला है, उनका फिजिकल वेरिफिकेशन किया जा रहा है। कुछ आवेदनकर्ताओं को भुगतान किया भी गया है। हालांकि किसी भी फाइल को देखने के बाद ही उसके बारे में कुछ बताया जा सकता है।
- विजय सैनी, सीटीएल, एसबीएम, नगर निगम, पानीपत।